पड़ोसी देश नेपाल में इन दिनों एक नई बहस छिड़ी हुई है. प्रधानमंत्री बालेन शाह की मुहिम के बाद नेपाल के कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों और खासकर त्रिभुवन यूनिवर्सिटी (TU) में छात्र राजनीति को पूरी तरह से बैन करने की तैयारी हो रही है. कैंपस में अब न झंडे दिखेंगे, न ही नारों की गूंज. लेकिन सवाल यह है कि लोकतंत्र की जननी कही जाने वाली छात्र राजनीति पर यह प्रहार क्यों? और क्या भारत में भी कभी ऐसा हुआ है?
