बूंदी में एक 16 वर्षीय नाबालिग बालिका का बाल विवाह रुकवाया गया है। जिला प्रशासन ने ‘बाल विवाह मुक्त भारत अभियान’ के तहत यह प्रभावी कार्रवाई की। बालिका को बूंदी के राजकीय बालिका गृह में सुरक्षित प्रवेश दिलाया गया है। जानकारी के अनुसार, यह बालिका 13 फरवरी 2026 को कोटा के ग्रामीण क्षेत्र से एक युवक के साथ चली गई थी। वह युवक के रिश्तेदारों के यहां जयपुर सहित कई स्थानों पर रही। बाद में, युवक के परिजनों ने 24 फरवरी 2026 को बूंदी जिले के करवर थाना क्षेत्र में बालिका का बाल विवाह तय किया था। इस मामले में कई अनियमितताएं सामने आईं। 14 फरवरी 2026 को कोटा में ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ के नाम पर एक स्टांप पेपर तैयार करवाया गया था। इसके अतिरिक्त, मंदिर में माला पहनाकर विवाह संपन्न होने का दिखावा किया गया और बालिका के आधार कार्ड में जन्मतिथि भी अवैध रूप से बदलवाई गई थी। घटना की सूचना मिलते ही बाल कल्याण समिति, चाइल्डलाइन 1098 और उपखंड अधिकारी ने तुरंत संज्ञान लिया। एक संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और बाल विवाह से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। इनमें बैंड-बाजा, डीजे, मंदिर परिसर और हलवाई/कैटरिंग से जुड़े सबूत शामिल थे। 24 फरवरी 2026 को जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति और चाइल्डलाइन की टीम ने पूरे दिन निगरानी और रेकी की। शाम लगभग 5:00 बजे बालिका को एक मकान से सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। बाल कल्याण समिति के आदेश पर उसे राजकीय बालिका गृह बूंदी में प्रवेश दिलाया गया। बूंदी बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने इस कार्रवाई पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य, शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। पोद्दार ने इसे कानूनी अपराध और समाज के विकास में एक बड़ी बाधा बताया।
