राजस्थान शिक्षा सेवा परिषद (प्रधानाचार्य) ने वर्तमान शिक्षा सत्र में शिक्षकों पर BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) के कार्य और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों का अतिरिक्त भार डाले जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि विधानसभा और आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर शिक्षकों की BLO ड्यूटी और अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों के चलते विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है। परिषद ने अतिरिक्त जिला कलक्टर नागौर के जरिए मुख्य सचिव, शासन सचिवालय को संबोधित पत्र में कहा है कि राजकीय विद्यालयों में कार्यरत कई अध्यापक एवं व्याख्याता 04/11/25 से 04/12/25 तक एक माह के लिए BLO व सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत हैं। साथ ही, शिक्षण कार्य को सुचारू रखने के लिए उन्हें कार्यमुक्त होने से पहले सिलेबस पूरा करने का भी निर्देश दिया गया है। ऐसे में, पहले से ही शिक्षकों के अवकाशों और उपस्थिति पर लगी पाबंदी तथा अब BLO ड्यूटी के कारण, विद्यालयों में अत्यधिक अवकाश हो रहे हैं, जिससे शिक्षण व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। परिषद के पदाधिकारियों ने आग्रह किया है कि यदि यह स्थिति जारी रही तो आगामी वार्षिक परीक्षा, जो अप्रैल 2026 से शुरू होने की योजना है, के परिणाम गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। गैर-शैक्षणिक कार्यों पर आपत्ति संगठन ने विशेष रूप से उस आदेश पर आपत्ति जताई है जिसमें प्रधानाध्यापकों को अपने विद्यालय के साथ-साथ पंचायत समिति, चिकित्सा विभाग, किसान विभाग, तहसील कार्यालय, नगर पालिका, नगर परिषद और समाज कल्याण विभाग जैसे अन्य विभागों के BLO का लॉग बुक संधारित करने का निर्देश दिया गया है। परिषद ने इस निर्देश को शिक्षा विभाग के मूल शैक्षणिक कार्य से भटकाने वाला बताया है। परिषद ने राज्य सरकार से मांग की है कि शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए और उनकी BLO ड्यूटी समाप्त की जाए। साथ ही, शिक्षा विभाग से अनुरोध किया गया है कि अध्यापकों एवं व्याख्याताओं के अवकाश पर लगी पाबंदी को तत्काल हटाया जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्रता से कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो परिषद सरकार के अमानवीय आदेशों का विरोध करते हुए आंदोलन करने को मजबूर हो जाएगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी राज्य सरकार एवं प्रशासन की होगी।