नागौर जिला मुख्यालय पर खस्ताहाल सड़कें आमजन के लिए परेशानी का सबब बन गई है। कई कॉलोनियों में तो हालत यह है कि सड़क कम और गड्ढे ज्यादा नजर आते है। ऐसे में वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वालों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगरपरिषद और जनप्रतिनिधियों को आम जनता से कोई सरोकार नहीं है। सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं, जिनकी वजह से आए दिन हादसे होते रहते है। लेकिन, न तो प्रशासन सुनवाई कर रहा है और न जनप्रतिनिधि। बारिश में धुल गई सड़कें इस बार जिले में हुई भारी बारिश की वजह से सड़कें बुरी तरह से टूट चुकी है। शहर के लक्ष्मी नगर सहित अधिकांश इलाकों में सड़कें बुरी तरह से क्षतिग्रस्त है। बारिश के बाद शहर के कुछ इलाकों में तो पेंचवर्क करवाया गया लेकिन शहर की अधिकांश सड़कें अब गड्ढों में तब्दील हो गई है। शहर के रहने वाले विक्रम कच्छावा बताते हैं कि हवाई पट्टी की तरफ जाने वाली सड़क खराब हालात में है। यह रास्ता CMHO और केंद्रीय विद्यालय को भी जाता है। सड़क पर बड़े बड़े गड्ढे बने हुए है, लेकिन इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। लक्ष्मी नगर के रहने वाले पवन बताते है कि सीवरेज कार्य के बाद लक्ष्मीनगर में सके डाली गई थी जो बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हो गई। अब बड़े-बड़े गड्ढे है, जिनमें कई बार दुपहिया वाहन चालक हादसे का शिकार हो जाते हैं। शहर के विकास कार्य प्रभावित नागौर नगरपरिषद में लंबे समय से स्थाई सभापति नहीं होने की वजह से शहर के विकास कार्य ठप पड़े हैं । जो सभापति सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है उसके पास पावर नहीं होने से वो किसी प्रकार के विकास कार्यों की स्वीकृति ही नहीं दे सकती लेकिन अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं जिसकी वजह से नागौर शहर के हाल बेहाल हैं।