नागौर जिले के कुचेरा थाना क्षेत्र में करीब 13 साल पहले हुए जानलेवा हमले और अपहरण के मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश (संख्या-02) कुमकुम सिंह ने दोषी करार देते हुए कड़ी सजा सुनाई है। न्यायालय ने मुख्य अभियुक्त पुखराज (बलाया सरपंच), गणपतराम, सुरेश पुत्र रामदयाल, कैलाश, सुरेश पुत्र भंवरलाल और रामनरेश को दोषी मानते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 20-20 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी अलग-अलग सजाएं और जुर्माने लगाए गए हैं। हालांकि न्यायालय ने आदेश दिया है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। मेले में घात लगाकर किया था हमला मामले के अनुसार घटना 19 सितंबर 2013 की है। प्रार्थी नरपतराम अपने भाइयों और रिश्तेदारों के साथ ग्राम ग्वालू में संतोष नाथ जी के मेले में गया था। इसी दौरान मध्यरात्रि के करीब दो सफेद गाड़ियों में सवार होकर आए आरोपियों ने हथियारों से लैस होकर पीड़ित पक्ष पर अचानक हमला कर दिया। भाई का अपहरण कर जान से मारने की कोशिश आरोपियों ने मारपीट के बाद प्रार्थी के भाई श्रवणराम का अपहरण कर उसे गाड़ी में डाल लिया। पीछा करने पर आरोपियों ने श्रवणराम के साथ दोबारा बेरहमी से मारपीट की और उसे मृत समझकर एक सुनसान जगह पर फेंक दिया। इसके बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। यह पूरी वारदात पुरानी रंजिश के चलते अंजाम दी गई थी, जिससे इलाके में उस समय भारी सनसनी फैल गई थी। अभियोजन ने रखे मजबूत साक्ष्य कुचेरा थाना पुलिस ने मामले की गहन जांच के बाद न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक सुभाषचंद्र चौधरी ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन ने अदालत के समक्ष 21 गवाहों के बयान, 67 महत्वपूर्ण दस्तावेज और 5 आर्टिकल पेश किए।
