नागौर जिले में मार्च के दूसरे सप्ताह में ही गर्मी ने अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। बीते एक सप्ताह से लगातार बढ़ रहे तापमान ने लोगों को अप्रैल-मई जैसी गर्मी का एहसास कराना शुरू कर दिया है। सोमवार को जिले का अधिकतम तापमान 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिससे दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा नजर आया और आम जनजीवन भी प्रभावित होने लगा है। तपती धूप और बढ़ती गर्मी के कारण दोपहर के समय सड़कों पर भीड़भाड़ कम हो गई है। हीटवेव का अलर्ट के बाद मजबूरी में घर से बाहर निकलने वाले लोग लू और गर्मी से बचने के लिए मुंह और हाथ ढंककर बाहर निकल रहे हैं। स्टेशन रोड सहित शहर के कई प्रमुख मार्गों पर दोपहर के समय सन्नाटा जैसा माहौल देखने को मिल रहा है। ठंडे पेय और आइसक्रीम की बढ़ी मांग अचानक बढ़ी गर्मी का असर बाजारों में भी दिखाई दे रहा है। सड़क किनारे लगने वाले कोल्ड ड्रिंक और आइसक्रीम के ठेलों पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है। गर्मी से राहत पाने के लिए लोग ठंडे पेय और आइसक्रीम का सहारा ले रहे हैं। दिन-रात के तापमान में अब भी अंतर हालांकि दिन और रात के तापमान में अभी भी काफी अंतर बना हुआ है। दिन में जहां लोग घरों और कार्यस्थलों पर एसी और कूलर का सहारा लेने लगे हैं, वहीं रात का न्यूनतम तापमान करीब 18 डिग्री रहने से कई लोग अभी भी हल्के कंबल का इस्तेमाल कर रहे हैं। सप्ताह के अंत में मिल सकती है मामूली राहत मौसम विभाग के अनुसार सप्ताह के अंत में आसमान में बादलों की मौजूदगी के कारण तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि फिलहाल तेज धूप और बढ़ती गर्मी के कारण दोपहर में घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। ग्लोबल वार्मिंग और पेड़ों की कटाई भी वजह भूगर्भशास्त्री डॉ. अरुण व्यास के अनुसार बढ़ते कार्बन उत्सर्जन और ग्लोबल वार्मिंग के साथ-साथ पेड़ों की अंधाधुंध कटाई भी समय से पहले गर्मी बढ़ने का मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ हो रही छेड़छाड़ के कारण ग्लोबल वार्मिंग का असर लगातार बढ़ रहा है, जिसका सीधा प्रभाव स्थानीय मौसम चक्र पर पड़ रहा है।