प्रदेश के मारवाड़ इलाके में स्मैक की सप्लाई करने वाले सबसे बड़े तस्कर जितेंद्र को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की टीम ने गिरफ्तार किया है। जितेंद्र ने महज तीन साल में ड्रग सप्लाई का सबसे बड़ा नेटवर्क तैयार किया। आईजी विकास कुमार ने बताया एएनटीएफ ने ऑपरेशन जिस्मन्ना के तहत गुरुवार रात 9:30 बजे बाड़मेर के रामजी की गोल से तस्कर को गिरफ्तार किया। जितेंद्र बेंगलुरु जा रहा था और इसकी प्लानिंग भी उसकी पत्नी ने गर्लफ्रेंड से पीछा छुड़ाने के लिए की थी। इस प्लानिंग के बारे में जब टीम को पता चला कि जितेंद्र बेंगलुरु से पूरे नेटवर्क को चलाने की तैयारी कर रहा है तो नाकाबंदी की और बस से उसे गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने बताया कि वह एक महीने में 20 किलो स्मैक पूरे मारवाड़ में सप्लाई करता था। इससे वह 50 लाख रुपए की कमाई करता था। आठवीं तक पढ़ा, पिता ने बेंगलुरु भेजा
पूछताछ में जितेंद्र ने बताया कि वह आठवीं तक ही पढ़ा हुआ है। वह बड़ा आदमी बनना चाहता था। उसकी इस हरकत से पिता परेशान थे। साल 2020 में जितेंद्र ​के पिता ने उसे बेंगलुरु भेज दिया। यहां पिता के दोस्त की दुकान पर दो साल तक काम किया। लेकिन जितेंद्र के बड़े आदमी बनने का सपना पूरा नहीं हुआ। साल 2022 में वह दोबारा बाड़मेर आ गया। तब तक जितेंद्र की शादी हो चुकी थी। कुख्यात तस्कर प्रकाश का ड्राइवर बना
आईजी विकास कुमार ने बताया कि बेंगलुरु से दोबारा जब वह बाड़मेर आया तो यहां वह तस्कर प्रकाश के कॉन्टैक्ट में आया। इसके बाद वह प्रकाश का ड्राइवर बना। जितेंद्र प्रकाश के पूरे नेटवर्क को जान चुका था। इसके बाद वह प्रकाश का ही पार्टनर बन स्मैक सप्लाई का काम करने लगा। इस बीच प्रकाश जेल चला गया। प्रकाश के साल 2022 में जेल जाने के बाद जितेंद्र ने पूरे नेटवर्क को संभाला। आईजी ने बताया कि महज तीन साल में वह मारवाड़ में ड्रग तस्करी का किंगपिन बन गया। पूरे मारवाड़ में स्मैक सप्लाई का नेटवर्क वह चलाने लगा। आईजी विकास कुमार ने बताया कि 3 साल में जितेंद्र पर 8 मामले दर्ज हुए। इसमें तीन बार जेल भी जाकर आया। हर बार जेल से निकलता तो पिता और पत्नी नशे के धंधे से दूर रहने की कसम दिलाते। लेकिन जितेंद्र दोबारा इस काम में उतर जाता। पूछताछ में उसने बताया कि स्मैक की सप्लाई करने के साथ खुद भी नशे का आदी हो गया। नशे की लत के कारण बिस्तर पकड़ने लगा। इसके बाद घरवालों ने नशामुक्ति केंद्र में भर्ती करवाया। इलाज के चक्कर में काली कमाई से बनाए सारे घर-खेत बिक गए। एक बार फिर जितेंद्र कंगाली के उसी शुरुआती दौर में पहुंच गया था। जब वह दोबारा सही हुआ तो स्मैक के धंधे में आ गया। इसके बाद उस पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया। पत्नी को पता चला गर्लफ्रेंड के बारे में तो बनाई प्लानिंग
जब जितेंद्र पर इनाम घोषित हुआ तो वह भूमिगत हो गया। मोबाइल बंद कर दिया था। इसी बीच पत्नी को पता चला कि वह इसका फायदा उठाकर गर्लफ्रेंड के पास रह रहा है। इस दौरान पत्नी ने कई बार गर्लफ्रेंड से दूर रहने की बात कही, लेकिन जितेंद्र पुलिस का डर बताते हुए घर न आने का कारण बताता। इसके बाद वह अधिकांश समय गर्लफ्रेंड के साथ रहने लगा। पत्नी को जब पता चला कि जितेंद्र गर्लफ्रेंड के पास ही रह रहा है तो उसी ने जितेंद्र को बेंगलुरु जाने की प्लानिंग बताई। पत्नी चाहती थी कि बेंगलुरु रहेगा तो वह गर्लफ्रेंड के कॉन्टैक्ट में भी नहीं आ पाएगा। इसलिए उसने जितेंद्र को भी ये ही बताया कि पुलिस से बचने के लिए वह बेंगलुरु चला जाए और वहीं पर छिपकर पूरे नेटवर्क को चलाया। जितेंद्र को भी पत्नी का आइडिया सही लगा और वहां छिपने की प्लानिंग करने लगा। पत्नी की सहेली से टीम को मिली जानकारी
जांच में सामने आया कि जितेंद्र की पत्नी की सहेली उसके गर्लफ्रेंड को लेकर बताना चाहती थी। इस पर जितेंद्र की पत्नी ने बातों-बातों में अपनी सहेली को बता दिया कि वह उसे बेंगलुरु शिफ्ट कर पीछा छुड़वा लेगी और इसकी प्लानिंग उसने कर ली है। ये बात एएनटीएफ की टीम तक पहुंची। टीम ने प्लानिंग कर बस, ट्रेन और प्लेन के टिकट की निगरानी रखना शुरू किया। प्लानिंग थी कि पत्नी का पीछा कर जितेंद्र तक पहुंचा जा सके, लेकिन दोनों काफी शातिर निकले। टीम को निगरानी को दौरान एक व्यक्ति मिला, जो बेंगलुरु का टिकट लेने के लिए आया था। उसने जितेंद्र के नाम से टिकट बुक करवा, उसे अपना दोस्त बताया। लेकिन टीम को तय नहीं था कि वह बस स्टैंड से चढ़ेगा या नहीं। ऐसे में आईजी विकास कुमार ने टीम बनाई और रामजी की गोल के आगे नाकाबंदी करवाई। जितेंद्र ट्रेवल्स की बस में सवार था। टीम ने बस को रुकवा कर चैकिंग की तो जितेंद्र उसमें सोता हुआ मिला, जिसे गिरफ्तार किया गया।