बाड़मेर में घर के बाहर सो रहे मां-बाप और बेटे को करैत प्रजाति के सांप ने काट लिया था। 3 महीने का मासूम इसलिए बच गया कि वो मां के साथ कंबल में लिपटा था। पति-पत्नी की मौत हो चुकी है, बेटा एम्स में भर्ती है। सेड़वा के फागलिया गांव में अब ग्रामीण रात में बाहर सोने से डर रहे हैं। दावा करते हैं- ये पीवणा सांप था, रात को छाती पर आकर बैठ जाता है और लोगों की सांसें पी (खींच) जाता है। इसलिए ये एक बार दिख जाए तो लोग उस इलाके में बाहर नहीं सोते। ग्रामीणों का दावा है- ये एक बार किसी डस ले तो फिर से दोबारा वहां आता है और वहां सो रहे लोगों को डस लेता है। अपने ही पैरों के निशान ढूंढ़ता है और पीछा करता है। इधर, एक्सपर्ट का कहना है कि ये दुनिया के सबसे जहरीले सांप में से एक है। पढ़िए ग्रामीणों के करैत को लेकर दावे में कितनी है सच्चाई… 3 पॉइंट्स में समझिए मामला दावा: ‘छाती पर बैठ और फूंक मार कर सांस खींच ली’ अरटा निवासी पांचाराम कहते हैं- तीनों सो रहे थे। सांप आया और छाती पर बैठ कर फूंक मारकर गया। इससे दोनों खत्म हो गए। इस मौसम में सांप नहीं आते हैं, बारिश के बाद आते हैं। ऐसा बताया जाता है कि पश्चिम रेतीली धरती से आते और पूर्व की तरफ जाते हैं। अरटा निवासी पांचाराम कहते हैं- ये सांप कोई निशान नहीं छोड़ता है। मुंह में छाला होता है। जब वह फूट जाता है तो इंसान खत्म हो जाता है। कारण यह कि छाला जब फूटता है तो जहर पेट में चला जाता है। इससे शरीर के अंग काम करना बंद कर देते हैं। एक्सपर्ट: सांस नहीं खींचता; न्यूरोटॉक्सिन जहर है जानलेवा सेड़वा में पति-पत्नी और बच्चे की हालत देख उन्हें बाड़मेर रेफर करने वाले डॉक्टर कालूराम ने बताया- जरूरी नहीं कि मुंह में छाला हो। ग्रामीणों में सांप की करैत प्रजाति को लेकर मिथक हैं। दरअसल, करैत सांप के दांत इतने बारीक होते हैं कि न तो इससे दर्द होता है न ही खून आता है। उसके काटने से सूजन तक नहीं आती। करैत का जहर न्यूरोटॉक्सिन होता है, जो दिमाग को कंट्रोल सिस्टम को डैमेज करता है। स्नेक एक्सपर्ट आविश शर्मा बताते हैं- करैत को साइलेंट किलर है। एशिया महाद्वीप के सबसे जहरीले सांपों में से एक है। छाती पर बैठकर सांस खींचने की बात बिल्कुल गलत है। यह अन्य सांपों की तरह बाइट करता है। दांत इतने महीन और छोटे होते हैं कि हमें मच्छर के काटने जैसा दर्द होता है। यह अक्सर रात को निकलता है। इसके काटने का पता ही नहीं चल पाता। सोते हुए नींद में इंसान समझता है कि किसी मच्छर ने काटा है। सोए रहने के कारण हम इसका इलाज नहीं मिलता है। दावा: खुद के पैरों का पीछा करता है पीवणा सांप ग्रामीण कहते हैं- ऐसा पूर्वज बताते हैं कि पीवणा सांप (करैत) घूमता हुआ आता है। सोए हुए इंसानों की छाती पर बैठ जाता है फिर फूंक मारता है, सांसें खींच लेता है। अगली रात को फिर यह वापस आता है, अपने पैरों के निशान का पीछा करते हुए उसी जगह… वहां अन्य लोगों की भी सांसें खींच लेता है। एक्सपर्ट: बिस्तर में छिप जाता है; नींद में हलचल होते ही बार-बार डसता है आविश शर्मा बताते हैं- करैत अपनी बॉडी के तापमान को बराबर रखने के लिए बाहर बिस्तरों में छुप जाता है। रात में जैसे ही हमारा शरीर हलचल करता है तो यह हलचल को खतरा मान कर बाइट करता है, बार-बार बाइट करता है। जिसे सांप ने काटा है उसे पता ही नहीं चलता और सुबह तक इलाज मिलने से पहले उसकी मौत हो चुकी होती है। सांप किसी का या अपने पैरों का पीछा नहीं करते हैं। हो सकता है, शिकार मिलने के चलते सांप बार-बार एक ही जगह आता रहा हो।
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