जिला एवं सत्र न्यायाधीश चक्रवर्ती सिंह महेचा ने दहेज प्रताड़ना और आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण के एक मामले में सोमवार को फैसला सुनाया। अभियुक्त मोटाराम पुत्र बिंजाराम को धारा 306 आईपीसी के तहत सात साल के कठोर कारावास और 2500 रुपए जुर्माने की सजा दी गई। जुर्माना अदा न करने पर एक महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दहेज प्रताड़ना के आरोप में उसे दो साल सजा इसके अलावा, धारा 498ए आईपीसी के तहत दहेज प्रताड़ना के आरोप में उसे दो साल का कठोर कारावास और 500 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना न देने पर सात दिन का अतिरिक्त कारावास होगा। सरकार की ओर से लोक अभियोजक विजय कुमार ओझा ने इस मामले में पैरवी की। 10 साल पहले का मामला यह मामला 7 अक्टूबर 2015 को कानाराम पुत्र मालाराम मेघवाल निवासी ननेऊ, विजयनगर पुलिस थाना बाप द्वारा दर्ज करवाया गया था। कानाराम ने अपनी बहन देवी के पति मोटाराम पुत्र बिंजाराम मेघवाल के खिलाफ शिकायत की थी, जिनकी शादी चार साल पहले हुई थी। शिकायत में बताया गया था कि शादी के कुछ समय बाद ही पति मोटाराम, सास सुखी और काकी ससुर तुलसाराम ने देवी को कम दहेज लाने के लिए परेशान करना शुरू कर दिया था। मोटाराम देवी के साथ रोज मारपीट करता और परिवार से पैसे लाने की धमकी देता था। बेटी के जन्म देने पर मारपीट की जब देवी ने एक बेटी को जन्म दिया, तो उसकी सास ने उसे ताने मारे और मारपीट की यह कहकर कि उसने बेटा नहीं दिया। बीच में एक बार पंचायती होने पर बहन को वापस ससुराल भेज दिया गया था। 5 अक्टूबर 2015 को देवी के ससुराल से कुछ लोग कानाराम के गांव आए और बताया कि देवी की टांके में गिरकर मौत हो गई है। कानाराम, विजयनगर सरपंच और 10-15 अन्य लोगों के साथ ससुराल पहुंचे। उन्होंने देखा कि देवी के शव पर मुंह, छाती, पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें थीं और शरीर खून से लथपथ था।