प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधा। डोटासरा ने कहा- काम कहां चल रहा है? मुख्यमंत्री के पास जाते हैं तो वह कहते हैं ‘मुरली वाला करेगा’। अधिकारी के पास जाते हैं तो वे कहते हैं माल लेकर आओ, मंत्री के पास जाते हैं तो कोई सुनता नहीं, विधायक के पास जाते हैं तो वह कहता है मंत्री सुनते नहीं। यह पूरा तमाशा बना रखा है। डोटासरा ने आगे कहा- मुख्यमंत्री तो खुद नए हैं। पोस्ट पर आने से कोई अनुभव नहीं हो जाता। पहली बार का विधायक छह बार के विधायक को ज्ञान दे रहा है, यह उलटी गंगा बह रही है। उनको पहले सीनियर लोगों को बुलाकर सरकार चलाने का मंत्र लेना चाहिए और फिर सरकार चलानी चाहिए। वसुंधरा राजे के घर जाकर ट्रेनिंग लेनी चाहिए और फिर काम करना चाहिए। जल्द ही पर्चियां बदलेंगी। प्रभारी मंत्री कागजों में हैं, प्रैक्टिकल में नहीं। दरअसल गुरुवार को गोविंद सिंह डोटासरा जिला अध्यक्ष राजकुमार जयपाल के जन्मदिन कार्यक्रम में पहुंचे। यहां मीडिया से ये बातें कही। सीनियर आदमी की मुख्यमंत्री इज्जत नहीं करते डोटासरा ने कहा- अजमेर में पिछले 5 साल में कितने काम हुए हैं? बस एक वह विधानसभा वाली पुपाड़ी चल रही है। इसके अलावा क्या है, और कुछ है क्या यहां? उनकी भी मुख्यमंत्री नहीं मानते नाराज रहते हैं। वह कहते हैं बजट बढ़ा दो और मुख्यमंत्री बातों का बतंगड़ बना कर टाल देते हैं। इतने सीनियर आदमी की भी मुख्यमंत्री इज्जत नहीं करता है। अजमेर में आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी कैसे लेकर आए हैं। मुख्यमंत्री इसके पक्ष में नहीं थे। इस ढाई साल में जमीन तक आवंटित नहीं होगी काम तो दूर की बात है। स्पीकर देवनानी ने दबाव बनाया होगा इसलिए मुख्यमंत्री ने कर दिया। लेकिन उनकी मंशा नहीं थी। यह जो आंतरिक गृह युद्ध बीजेपी का चल रहा है, यह प्रदेश के लिए घातक है। मदन राठौड़ तो मोदी को रिटायरमेंट की सलाह दे रहे हैं गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संन्यास ले लेना चाहिए। ऐसा हुआ तो देश और लोकतंत्र दोनों बच जाएंगे। इतना ही नहीं डोटासरा ने कहा कि राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन मंत्रियों और विधायकों के फ्रस्ट्रेटेड बेटों को सेट करने का एडजस्टमेंट केंद्र बन चुका है। पिछले दिनों भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने बयान दिया था कि मोदी के नेतृत्व में भारत की तस्वीर बदली है। यह राजनीति नहीं सेवा का सफर है। इस बयान पर पटवार करते हुए डोटासरा ने कहा कि मदन राठौड़ तो मोदी को रिटायरमेंट की सलाह दे रहे हैं क्योंकि मोदी उनके बड़े भाई हैं। इसलिए मोदी को अपने छोटे भाई की बात माननी चाहिए और संन्यास ले लेना चाहिए जिससे लोकतंत्र और देश दोनों बच जाएगा।
सरकार पंचायत और निकाय चुनाव करवाने में अक्षम
डोटासरा ने कहा- सरकार पंचायत और निकाय चुनाव करवाने में अक्षम है। उनकी नीयत ख़राब है और हार का डर है, इसलिए चुनाव नहीं करवा रहे। चुनाव के लिए जो संवैधानिक प्रावधान हैं। उनका भी मखौल उड़ा रहे हैं। जब 73वां और 74वां संविधान संशोधन हुआ, उसके बाद प्रावधान है कि 5 साल के अंदर-अंदर सारी प्रक्रिया पूरी करके चुनाव करवाने चाहिए और पहले होते भी आए हैं। जब कोरोना महामारी आई, केवल तब सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से चुनाव आगे-पीछे हुए थे। लेकिन अब सरकार अनर्गल बयानबाजी कर रही है। डोटासरा ने आगे कहा- ओबीसी आयोग की रिपोर्ट इनको सरकार बनते ही ले लेनी चाहिए थी। जानबूझकर चुनाव में देरी करने के लिए ओबीसी आयोग का गठन नहीं किया गया। अब जब आयोग रिपोर्ट देने के लिए तैयार है, तो सरकार उससे रिपोर्ट नहीं ले रही। अब सरकार तर्क दे रही है कि कांग्रेस ने भी 13-17 साल तक चुनाव नहीं करवाए थे। अब इन्हें कौन बताए कि तब संविधान में प्रावधान ही नहीं था। जब 73वां और 74वां संशोधन जोड़ा गया, उसके बाद कोरोना को छोड़कर सरकार एक दिन भी बता दे कि चुनाव लेट हुए हों। ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लेना सरकार की ड्यूटी है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में यह भी कहा है कि यदि सरकार आयोग की रिपोर्ट लेने में सक्षम नहीं है, तो बिना उस रिपोर्ट के भी चुनाव करवाने चाहिए। चुनाव आप नहीं टाल सकते, परिसीमन नहीं होने या आयोग की रिपोर्ट नहीं आने की बात कहकर। आज से हम अलग-अलग जिलों में जाकर लोगों को इस सरकार की सच्चाई बताएंगे कि ब्यूरोक्रेसी लगाकर इन्होंने पंचायत और निकायों पर कब्जा कर रखा है। इनके पास करने के लिए कुछ है नहीं, केवल फालतू की बयानबाजी करते हैं। —- डोटासरा से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… डोटासरा बोले- महंगाई बढ़ रही, राहत देने के प्रयास नहीं:जूली ने कहा- सरकार की नीतियां सही नहीं, शहीद स्मारक पर कांग्रेस ने किया प्रदर्शन
जयपुर में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा- प्रधानमंत्री बनने के समय नरेंद्र मोदी ने महंगाई कम करने, बेरोजगारी खत्म करने, भ्रष्टाचार रोकने और आर्थिक और विदेश नीति को मजबूत करने जैसे कई वादे किए थे, लेकिन इतने सालों बाद भी इन वादों पर ठोस नतीजे नजर नहीं आ रहे हैं। (पूरी खबर पढ़ें)
