जोधपुर के ऐतिहासिक जय नारायण व्यास टाउन हॉल की जर्जर स्थिति और हाल ही में हुए निर्माण कार्यों में मिली गंभीर खामियों पर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की डिवीजन बेंच ने मामले में स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे “स्टेट मशीनरी की पूर्ण विफलता” करार दिया। कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिकारियों के ढुलमुल रवैये को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि वर्ष 2018 से लगातार निर्देश देने के बावजूद टाउन हॉल बंद पड़ा है। कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी, पर्यटन विभाग को संयुक्त शपथ पत्र पेश करने और इसके लिए जिम्मेदार अफसरों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट 15 जनवरी तक पेश करने को कहा है। इंस्पेक्शन रिपोर्ट: कभी भी गिर सकती है छत कोर्ट के समक्ष 22 दिसंबर 2025 को किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य ऑडिटोरियम की जिप्सम सीलिंग में दरारें आ गई हैं। ऊंचाई अधिक होने के कारण स्टील ट्रस रूफ से पानी रिसने की आशंका है, जिससे जिप्सम नरम हो गया है और यह “कभी भी गिर सकता है”। इंस्पेक्शन रिपोर्ट: 6 बड़ी खामियां, जो खतरे की घंटी हैं निरीक्षण रिपोर्ट में विजुअल असेसमेंट के आधार पर विशेषज्ञों ने टाउन हॉल की स्थिति को लेकर 6 प्रमुख कमियां बताई हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं: विशेषज्ञों ने निष्कर्ष दिया है कि तत्काल मरम्मत और स्ट्रक्चरल ऑडिट (ढांचागत जांच) के बिना टाउन हॉल का उपयोग खतरनाक हो सकता है। सांस्कृतिक गतिविधियां ठप, कलाकार मायूस सुनवाई के दौरान न्याय मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. सचिन आचार्य और संगीत नाटक अकादमी के पूर्व चेयरमैन रमेश बोराणा ने कोर्ट को बताया कि टाउन हॉल के बंद होने से शहर की सांस्कृतिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कोर्ट का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि टाउन हॉल के अलावा सूचना केंद्र का “जन कवि गणेश लाल व्यास मिनी ऑडिटोरियम” भी बंद पड़ा है। इससे कलाकारों के पास अपनी कला के प्रदर्शन के लिए कोई जगह नहीं बची है और कई शो, जो लंबे समय से चल रहे थे, बंद हो गए हैं। 15 जनवरी तक जवाब तलब कोर्ट ने अपने आदेश में निर्देश दिया है कि पीडब्ल्यूडी के सचिव और पर्यटन, कला एवं संस्कृति विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, 15 जनवरी तक एक संयुक्त शपथ पत्र पेश करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टाउन हॉल की इस बदहाल स्थिति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, यह बताया जाए। इसके साथ ही, टाउन हॉल और मिनी ऑडिटोरियम को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए एक समयबद्ध कार्यक्रम पेश करने का निर्देश भी दिया गया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि 15 जनवरी तक शपथ पत्र पेश नहीं किया गया, तो दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा। करोड़ों खर्च, फिर भी जर्जर गौरतलब है कि करीब 60 साल पुराने इस टाउन हॉल के जीर्णोद्धार पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे। 3 सितंबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जीर्णोद्धार के बाद टाउन हॉल का लोकार्पण किया था। लेकिन लोकार्पण के कुछ समय बाद ही इमारत की जर्जर हालत ने सरकारी दावों और निर्माण की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लगा दिए।
