झुंझुनूं-राजगढ़ स्टेट हाईवे पर टोल वसूली शुरू होते ही जन आक्रोश फूट पड़ा है। धनुरी स्थित टोल प्लाजा पर पिछले तीन दिनों से ग्रामीणों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। आसपास के करीब 50 गांवों के लोग लामबंद हो गए हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक उनकी 6 सूत्री मांगें पूरी नहीं होती, वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। टोल मुक्त क्षेत्र की मांग और अव्यवस्थाओं के खिलाफ 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले दर्जनों गांवों के लोग धरने में शामिल हुए। इस आंदोलन में किसान, युवा और व्यापारिक संगठनों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में शामिल हो रहे है। नियमों के उल्लंघन का आरोप: अवैध तरीके से स्थापित है टोल
अखिल भारतीय किसान सभा (मलसीसर) के महासचिव अरविन्द गढ़वाल ने धरने को संबोधित करते हुए टोल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि धनूरी में स्थापित यह टोल प्लाजा निर्धारित सरकारी नियमों और दिशा-निर्देशों को ताक पर रखकर लगाया गया है। गढ़वाल ने मांग की है कि इस टोल की स्थापना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जब तक जांच पूरी न हो, स्थानीय लोगों से वसूली बंद की जाए।
ग्रामीणों की 6 सूत्री मांगें ग्रामीणों ने प्रबंधन को जो ज्ञापन सौंपा है, उसमें टोल नियमों के उल्लंघन और स्थानीय हितों की अनदेखी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। 20 किमी परिधि में टोल माफी: स्थानीय लोगों की मांग है कि टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी गांवों के निजी वाहनों को टोल से पूरी तरह मुक्त किया जाए। 60 किमी की दूरी का नियम: प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि नियमों के अनुसार दो टोल के बीच 60 किमी की दूरी होनी चाहिए, जबकि लम्बोर बड़ी और धनूरी के बीच महज 43 किमी का अंतर है। ग्रामीणों ने इसे अवैध बताते हुए टोल हटाने की मांग की है। पौधारोपण का अधूरा वादा: रोड निर्माण के समय तय किए गए 16,700 पेड़ अभी तक नहीं लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने इन्हें तुरंत लगाने की मांग की है। सुरक्षा मानकों की अनदेखी: हाईवे पर सुरक्षा और दिशा-निर्देशों (Signs) का अभाव है, जिसे लेकर ग्रामीणों ने प्रबंधन को घेरा है।
ये प्रमुख लोग रहे मौजूद आंदोलन में अजीत सिंह, महेन्द्र बाबल, तौफीक, विजय खालिया, देवकीनंदन बसेरा, जयपाल महला, शीशराम सरावग, महिपाल पूनिया, नरेश राहड़, दिनेश, शाहिद खान, जगमाल, न्यूम भाटी, अनीश, साहिन, सुमित बलौदा, राजवीर खीचड़, अलीमुद्दीन, विकास महला, अनूप कटारिया, अरुण कालेर, सुरेंद्र सिलाएच, संदीप रेवाड़ और सद्दाम सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा मौजूद रहे।
