झालावाड़ मेडिकल कॉलेज अस्पताल में पहली बार दोनों कूल्हों के जोड़ों का एक साथ सफल प्रत्यारोपण किया गया है। इस जटिल सर्जरी को ऑर्थोपेडिक यूनिट बी के प्रभारी प्रोफेसर डॉ. महावीर मीणा के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। झालावाड़ के आंवली गांव निवासी राजकुमार लंबे समय से दोनों कूल्हों के जोड़ों में दर्द और चलने-फिरने में गंभीर परेशानी का सामना कर रहे थे। जांचों में यह सामने आया कि उनके दोनों कूल्हों के जोड़ गल गए थे, जिसे चिकित्सकीय भाषा में ‘एवेसकुलर नेक्रोसिस’ कहा जाता है। डॉक्टरों ने उन्हें जोड़ों के प्रत्यारोपण की सलाह दी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कर आवश्यक जांचें पूरी की गईं। मरीज राजकुमार ने अपनी इच्छा व्यक्त की थी कि उनके दोनों कूल्हों का प्रत्यारोपण एक साथ किया जाए। इस पर विचार करते हुए, मेडिकल टीम ने लगभग ढाई घंटे की सिंगल सेटिंग सर्जरी में दोनों कूल्हों के जोड़ों का सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया। डॉ. मीणा ने बताया कि झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में दोनों कूल्हों के जोड़ एक साथ बदलने का यह पहला मामला है। यह उपचार मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क किया गया। निजी अस्पतालों में इस तरह के ऑपरेशन पर अनुमानित 3 से 4 लाख रुपए का खर्च आता है। ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. महावीर मीणा, डॉ. विजय, डॉ. हर्ष, डॉ. अजीत, डॉ. विकास, डॉ. हिमांशु और डॉ. राजकुमार शामिल थे। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. अटल राज मेहता और डॉ. आशु ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। झालावाड़ मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. संजय पोरवाल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि पहले ऐसी जटिल सर्जरी के लिए मरीजों को इंदौर, अहमदाबाद या मुंबई जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता था। अब यहां आर्थोपेडिक विभाग में कॉम्प्लेक्स ट्रॉमा, स्पाइन, आर्थ्रोस्कॉपी और ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सहित सभी प्रकार की सर्जरी सफलतापूर्वक की जा रही हैं।
