जोधपुर शहर की बिगड़ती सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट का सख्त रुख जारी है। इसी से जुड़े मामले में राज्य सरकार और नगर निगम ने कोर्ट को बताया है कि वे शहर को साफ रखने के लिए ‘डूंगरपुर मॉडल’ के सूत्रधार के.के. गुप्ता की मदद ले रहे हैं। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की खंडपीठ ने गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई की। सरकार की ओर से कोर्ट को आश्वस्त किया गया है कि शहर से गंदगी और मलबा हटाने के लिए एक ठोस योजना तैयार की जा रही है। कोर्ट ने सरकार के आग्रह पर प्रगति रिपोर्ट पेश करने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई 3 फरवरी को तय की है। डूंगरपुर से बुलाए गए एक्सपर्ट, मीटिंग हुई सुनवाई के दौरान सरकार और निगम की ओर से पैरवी कर रहे AAG वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश पंवार ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट द्वारा गत 14 नवंबर को दिए गए निर्देशों की पालना में विभाग सक्रिय हुआ है। उन्होंने बताया कि इस सिलसिले में डूंगरपुर नगर परिषद के पूर्व सभापति और स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर रहे के.के. गुप्ता को विशेष रूप से जोधपुर बुलाया गया था। एएजी ने कोर्ट को जानकारी दी कि एक्सपर्ट गुप्ता के साथ सक्षम अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई है, जिसमें जोधपुर की सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए रोडमैप तैयार किया जा रहा है। हर वार्ड में बनेगी निगरानी कमेटी कोर्ट को बताया गया कि सफाई व्यवस्था को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। AAG ने सबमिशन दिया कि शहर की स्वच्छता का ध्यान रखने के लिए अब ‘वार्ड-वाइज कमेटियां’ गठित की जा रही हैं। ये कमेटियां अपने-अपने क्षेत्र में कचरा प्रबंधन और सफाई कार्यों की निगरानी करेंगी। सरकार ने कहा- अभी थोड़ा समय और चाहिए राज्य सरकार की ओर से कोर्ट से अनुरोध किया गया कि सफाई को लेकर उठाए गए कदमों और प्रोग्रेस रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लाने के लिए उन्हें कुछ और समय दिया जाए। खंडपीठ ने इस प्रार्थना को स्वीकार करते हुए मामले को 3 फरवरी तक के लिए टाल दिया। गौरतलब है कि जोधपुर निवासी महेश गहलोत ने जनहित याचिका दायर कर शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था का मुद्दा उठाया था, जिस पर कोर्ट लगातार निगरानी रख रहा है।