जैसलमेर के सीमावर्ती इलाकों में खेती के लिए पानी की किल्लत दूर करने के उद्देश्य से सरकार अब एक्शन मोड में है। जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त सचिव और चीफ अमरजीत सिंह मेहरड़ा ने रामगढ़ के पास तनोट वितरिका (नहर) का दौरा किया। उन्होंने यहां चल रहे नहर के मरम्मत और आधुनिक बनाने के कामों (ERM) का बारीकी से जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान चीफ (मुख्य अभियंता) ने अधिकारियों और ठेकेदारों को साफ शब्दों में कहा कि राज्य सरकार की मंशा हर खेत तक पानी पहुंचाने की है। उन्होंने निर्देश दिए कि नहर के सुधार का काम पूरी गुणवत्ता के साथ और तय समय के भीतर पूरा किया जाए। मेहरड़ा ने कहा कि अगर काम की क्वालिटी अच्छी होगी, तभी जैसलमेर के अंतिम छोर पर बैठे काश्तकारों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा। अंतिम छोर के किसानों को मिलेगा पूरा फायदा नहर सुधार के इस प्रोजेक्ट से रामगढ़ और आसपास के दर्जनों गांवों के किसानों को सीधा लाभ होगा। लंबे समय से किसान नहर के अंतिम हिस्से तक पानी नहीं पहुंचने की शिकायत कर रहे थे। अब सरकार के इन प्रयासों से सिंचाई व्यवस्था सुधरेगी और आगामी फसलों की पैदावार में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। गर्मी में ‘तराई’ पर विशेष ध्यान देने की हिदायत जैसलमेर में बढ़ती गर्मी को देखते हुए मुख्य अभियंता ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य के दौरान कंक्रीट की ‘तराई’ (क्योरिंग) में कोई कोताही न बरती जाए। अक्सर तेज धूप और गर्मी की वजह से सीमेंट का काम कमजोर पड़ जाता है, इसलिए पानी का छिड़काव लगातार होता रहना चाहिए ताकि नहर की दीवारें और ढांचा सालों-साल मजबूत बना रहे। अधिकारियों की टीम रही साथ इस दौरे के दौरान विभाग के कई बड़े अधिकारी भी मौजूद थे। अतिरिक्त मुख्य अभियंता आर.के. मीणा, अधीक्षण अभियंता मधुसूदन रजोत और अधिशाषी अभियंता सुनील ने मौके पर चल रही तकनीकी प्रगति की जानकारी दी। टीम ने नहर की चौड़ाई, गहराई और सीमेंट की मोटाई जैसे मानकों को भी चेक किया।
