जैसलमेर में हुए बस अग्निकांड में अब तक 22 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हादसे के बाद शुक्रवार को जयपुर से आई टीम घटना स्थल पर पहुंची। टीम की ओर से अब तक की हुई जांच में इस हादसे का सबसे बड़ा कारण बस की बॉडी और इसके स्ट्रक्चर को लेकर आया है। इसमें बड़ी खामियां मिली हैं। बस कंपनी ने इमरजेंसी गेट के आगे दो सीट लगा दी थी। ऐसे में बस के पीछे मौजूद इमरजेंसी गेट का रास्ता छोटा हो गया था। ऐसे में लोग निकल नहीं पाए और जिंदा जल गए। वहीं ये भी सामने आया कि बस की बॉडी में लगे सामान ऐसे थे जिन्होंने आग को भड़का दिया। बस की बॉडी बनाने वाले ने इसकी लंबाई भी गलत तरीके से बढ़ा दी थी ताकि सीटें और स्लीपर की संख्या बढ़ जाए। चार दिन पहले हुआ था हादसा, 6 वेंटिलेटर पर जोधपुर के महात्मा गांधी हॉस्पिटल के अनुसार, 6 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। इसके अलावा 8 घायलों को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। जैसलमेर से जोधपुर जा रही प्राइवेट AC स्लीपर बस में 14 अक्टूबर की दोपहर 3.30 बजे आग लग गई थी। मौके पर ही 19 लोग जिंदा जल गए थे। एक व्यक्ति ने जैसलमेर से जोधपुर ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया था। 5 सदस्यीय टीम ने की जांच संयुक्त शासन सचिव ओ.पी. बुनकर ने बताया कि जैसलमेर बस दुखांतिका के बाद परिवहन विभाग ने तत्परता और संवेदनशीलता के साथ विस्तृत जांच कार्रवाई शुरू कर दी है। इस मामले में राज्य सरकार के परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग मुख्यालय की ओर से एक 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। यह समिति अपर परिवहन आयुक्त एवं संयुक्त शासन सचिव ओपी बुनकर की अध्यक्षता में कार्य कर रही है। बस में सुरक्षा मानकों की अनदेखी उजागर जांच टीम ने घटना स्थल और बस का निरीक्षण किया, जिसमें कई गंभीर लापरवाहियां सामने आईं। टीम के अनुसार बस की बॉडी निर्धारित लंबाई से अधिक बढ़ाई गई थी, जिससे बस भारी हो गई थी। सबसे बड़ी चूक यह पाई गई कि इमरजेंसी गेट के आगे दो सीटें बना दी गई थीं, जिससे आपात स्थिति में यात्री बाहर नहीं निकल पाए। बस के पीछे जो एग्जिट गेट था, वह इतना छोटा था कि आग लगने के बाद खुल ही नहीं पाया। बस के इंटीरियर में भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। टीम ने बताया कि बस के अंदर ज्वलनशील मटेरियल का प्रयोग किया गया था — जैसे कि खिड़कियों और स्लीपर के आगे लगे पर्दे। यही वजह रही कि आग बस के अंदर तेजी से फैली, जबकि बस के टायर और नीचे का हिस्सा ज्यादा नहीं जला। तकनीकी जांच CIRT पुणे को सौंपी गई राज्य सरकार ने इस हादसे की तकनीकी जांच एक स्वतंत्र संस्था सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट (CIRT), पुणे को सौंपी है। सीआईआरटी की टीम शुक्रवार शाम जैसलमेर पहुंची और मौके का निरीक्षण किया। टीम अब विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेगी। पटाखे मिले, पर आग का कारण स्पष्ट नहीं जांच में यह भी सामने आया कि बस में पटाखे और सजावट का सामान मौजूद था, लेकिन वे आग में नहीं जले। इससे यह संकेत मिला कि आग संभवतः किसी और वजह से लगी। जांच अधिकारी इस दिशा में भी संभावित कारणों का विश्लेषण कर रहे हैं। सरकार ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बस बॉडी निर्माण और फिटनेस प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों की सख्त पालना की जाएगी। जो भी ऑपरेटर या निर्माता नियमों की अनदेखी करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जांच समिति में शामिल विशेषज्ञ अधिकारी जैसलमेर बस अग्निकांड की ये खबरें भी पढ़िए… उपमुख्यमंत्रीजी, आपके बस में बिना चढ़े सुरक्षा गारंटी चाहिए:21 लाशें पूछ रही है उन हत्यारों को सजा कब, जो न सरकार को जानते हैं, न सिस्टम को जैसलमेर बस अग्निकांड के बाद 2 अफसर सस्पेंड:अब तक 21 मौतें, 4 मरीज अब भी वेंटिलेटर पर, 19 लोग जिंदा जल गए थे बस में से जलते हुए कूदे यात्रियों का VIDEO:चश्मदीद बोला- झुलसी महिलाएं अपना शरीर बचा रही थीं, आसपास से कपड़े मंगवाकर उन्हें ढंका जलती बस से कूदकर दौड़े थे पैसेंजर्स,जले हुए बैठे रहे;VIDEO:महिला चिल्लाई यहां एक लेडीज है, पहले उन्हें ले जाओ, हिम्मत करो एम्बुलेंस तक तो चलो आग का गोला बनी बस, हाथ जोड़कर यात्री बोले-बचा लो:ग्रामीण पानी के टैंकर लेकर दौड़े, रोती रहीं महिलाएं; देखें हादसे की 13 PHOTOS 5 दिन पहले खरीदी थी बस, आग का गोला बनी:275-किमी ग्रीन कॉरिडोर बनाकर 16 घायलों को जैसलमेर से जोधपुर भेजा, एक की रास्ते में मौत क्यों मौत की वजह बन जाती हैं स्लीपर बस?:पतली गैलरी हादसे के वक्त भागने का मौका नहीं देती, चीन 13 साल पहले कर चुका बैन आग लगते ही लॉक हो गया था बस का दरवाजा:चश्मदीद बोला-आर्मी ने JCB से गेट तोड़ा, अंदर लाशें थीं; नॉर्मल बस AC में मॉडिफाई थी
