रेगिस्तान की तपती रेत और जल संकट से जूझते इलाकों में अब जीवन का नया रंग दिखाई देने लगा है। जैसलमेर जिले के देगराय ओरण इलाके के तालाब पर इन दिनों दुर्लभ प्रवासी पक्षी ग्रेट कॉर्मोरेंट (बड़ा जलकाग) के 2 जोड़े देखे जा रहे हैं।
यह मछलियों को पकड़कर खाने वाला पक्षी है, जो सामान्यतः झीलों और नदियों के किनारे पाया जाता है। मगर इस बार यह रेगिस्तान के मध्य में बसे देगराय ओरण में डेरा जमाए हुए है। वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट और पक्षी प्रेमी सुमेर सिंह के अनुसार, यह पक्षी हर साल सर्दियों की शुरुआत में यूरोप, चीन और एशिया के ठंडे इलाकों से भारत की ओर प्रवास करता है। यह अक्टूबर से मार्च तक के महीनों में देश के जलाशयों, झीलों और नदी किनारों में देखा जाता है।
इस बार इस पक्षी के 2 जोड़ों को जैसलमेर के देगराय क्षेत्र में दिखाई देना पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह क्षेत्र शुष्क और अर्ध-शुष्क जलवायु वाला है, जहां पर ऐसे जलपक्षियों का टिकना मुश्किल माना जाता है। जल स्रोतों के पुनर्जीवन का संकेत
स्थानीय पर्यावरणविदों का कहना है कि देगराय ओरण में इन प्रवासी पक्षियों का आना इस बात का संकेत है कि इलाके में जल स्रोतों की स्थिति में सुधार हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में यहां वर्षा जल संरक्षण और ओरण तालाबों के पुनर्भरण पर विशेष काम किया गया है। अब लगातार बने जलभराव और आस-पास के पेड़-पौधों के कारण यह इलाका इन प्रवासी पक्षियों के लिए अनुकूल आवास बन गया है। प्रजनन काल में बदलता है रंग
इस पक्षी की सबसे खास बात इसका प्रजनन काल में रंग बदलना है। सामान्य दिनों में यह गहरे काले रंग का होता है, जबकि प्रजनन काल आने पर इसकी गर्दन के पास सफेद धब्बे और आंखों के आसपास हल्का सुनहरा रंग दिखने लगता है। यह परिवर्तन इसका प्रजनन संकेत माना जाता है और साथी को आकर्षित करने का तरीका भी। ग्रेट कॉर्मोरेंट के झुंडों को देगराय ओरण में पानी के किनारे बैठ, अपने पंख सुखाते हुए देखा जा सकता है। स्थानीय ग्रामीणों के लिए यह एक आकर्षक दृश्य बन गया है। प्रवासी पक्षी और स्थानीय जीवन का संतुलन
वन अधिकारी कुमार शुभम का कहना है कि कई बार प्रवासी पक्षियों को स्थानीय मछुआरे या बच्चे पत्थर मार देते हैं या डराते हैं, जिससे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है। विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि कोई भी व्यक्ति इन पक्षियों को परेशान न करे, क्योंकि यह जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि बीते दशक में कभी-कभार ही ऐसे प्रवासी पक्षी रेगिस्तान में देखे जाते थे, लेकिन अब उनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। इसे पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जल संरक्षण की दिशा में हुए कार्यों का सकारात्मक परिणाम बताया जा रहा है। क्यों चुनते हैं प्रवासी पक्षी राजस्थान को
राजस्थान में मौजूद कई कृत्रिम जलाशय, ओरण, तालाब, और नमी वाले मरुस्थलीय क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए आदर्श विश्राम स्थल हैं। यहां उन्हें पर्याप्त भोजन, गर्म जलवायु और शिकारियों से सुरक्षा मिलती है। जैसलमेर, अजमेर और भरतपुर जैसे इलाके विश्व प्रवासी पक्षी मार्ग (Migratory Bird Route) से जुड़े हैं। यही कारण है कि हर साल सर्दियों में हजारों किलोमीटर दूर से पक्षी यहां तक पहुंचते हैं।
