मोहाली जिले के जीरकपुर-पंचकूला बाइपास परियोजना के लिए हजारों पेड़ों की प्रस्तावित कटाई का मामला पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार और पंजाब सरकार सहित संबंधित एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी, केंद्र, पंजाब और हरियाणा सरकार सहित संबंधित विभागों को नोटिस जारी करते हुए 1 अप्रैल तक जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिका में दावा किया गया है कि इस बाइपास प्रोजेक्ट के चलते करीब 7 हजार पेड़ों को काटा जा सकता है। जिनमें कई पेड़ 100 वर्ष से अधिक पुराने हैं। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि प्रस्तावित हाईवे पंजाब से शुरू होकर हरियाणा के रास्ते गुजरेगा, जिससे बड़े स्तर पर हरित क्षेत्र प्रभावित होगा। गोल्फ कोर्स और ग्रीन बेल्ट भी होंगे प्रभावित सुनवाई के दौरान बताया गया कि पंचकूला के विकसित गोल्फ कोर्स क्षेत्र में करीब 14 हजार पेड़ मौजूद हैं, जहां से यह हाईवे निकालने की योजना है। इससे गोल्फ कोर्स के चार होल प्रभावित होंगे और लगभग 3 हजार पेड़ों की कटाई की आशंका है। इसके अलावा सेक्टर-1ए पंचकूला की ग्रीन बेल्ट, जहां वन्यजीवों की मौजूदगी भी बताई गई है, वहां करीब 2 हजार पेड़ों के प्रभावित होने की संभावना जताई गई है। 500 मीटर डायवर्जन से बच सकते हैं हजारों पेड़ याचिकाकर्ता ने कोर्ट में गूगल मैप्स और तस्वीरों के जरिए वैकल्पिक मार्ग भी पेश किया। दलील दी गई कि यदि बाइपास को करीब 500 मीटर डायवर्ट कर दिया जाए तो बड़े वन क्षेत्र को बचाया जा सकता है। साथ ही पहले से मौजूद नेशनल हाईवे-7 के उपयोग का सुझाव दिया गया, जिससे हजारों पेड़ों की कटाई टाली जा सकती है। याचिका में भारतीय वन रिपोर्ट 2023 का हवाला देते हुए बताया गया कि हरियाणा में कुल वन क्षेत्र मात्र 3.65 प्रतिशत है, जो निर्धारित 33 प्रतिशत के मुकाबले बेहद कम है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई पर्यावरण संतुलन को और बिगाड़ सकती है। टेंडर प्रक्रिया शुरू, लेकिन अंतिम अनुमति नहीं मामले में यह भी सामने आया कि 20 मार्च को इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, हालांकि पेड़ों की कटाई के लिए अभी अंतिम अनुमति नहीं मिली है। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि यदि समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो कटाई का काम शुरू हो सकता है। ट्राइसिटी का ‘ग्रीन लंग’ दांव पर याचिका में यह भी कहा गया है कि यह पूरा इलाका ट्राइसिटी- चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली का “ग्रीन लंग” है, जो वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने, तापमान संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर पेड़ों की कटाई गंभीर पर्यावरणीय चिंता का विषय बन गई है।