जालंधर में सामूहिक विवाह समारोह में सहयोग करने के नाम पर दस एनआरआई (विदेश में बसे भारतीय) से करीब 10 लाख रुपए की ठगी की गई। ये रकम जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी में मदद के लिए भेजी गई थी, लेकिन बाद में पता चला कि ऐसा कोई समारोह हुआ ही नहीं। समाज सेवक ने फोन किया बंद जब एनआरआई ने आयोजन करने वाले खुद को समाजसेवक बताने वाले व्यक्ति से संपर्क करने की कोशिश की, तो वह सोशल मीडिया से गायब हो गया और बाद में मोबाइल फोन भी बंद कर दिया। धोखेबाजों ने पहले गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए पैलेस बुक करने और घर बनवाने के नाम पर भी पैसे मांगे थे। पिंड रंधावा मसंदा के नंबरदार जुगल किशोर ने बताया कि ऐसे ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी संस्था को पैसे भेजने से पहले उसकी पूरी जांच-पड़ताल करें। उन्होंने कहा कि वे ठगों के मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट डिटेल लेकर साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाएंगे। खुद को सहारा फाउंडेशन नवांशहर का सदस्य बताया कनाडा से लौटे एनआरआई सरबजीत सिंह, सुरजीत लाल और अजीत सिंह ने बताया कि करीब चार महीने पहले उन्हें इंटरनेट कॉल आई थी, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को सहारा फाउंडेशन नवांशहर का सदस्य बताया। उसने दावा किया कि उनकी संस्था अब तक 100 से ज्यादा लड़कियों की शादी करवा चुकी है। उसने सोशल मीडिया पर कार्यक्रमों की तस्वीरें और वीडियो भी भेजे। हमें 10 लड़कियों की शादी करवानी थी फिर उस व्यक्ति ने कहा कि पूरी संस्था जानती है कि आप जरूरतमंद परिवारों की हमेशा मदद करते हैं। इस बार हमें 10 लड़कियों की शादी करवानी है और हर लड़की को दहेज देने की जिम्मेदारी है। सरबजीत सिंह ने अपने दोस्तों से संपर्क किया और करीब 8 लाख रुपए जमा कर उस ठग के खाते में ट्रांसफर कर दिए। जब उन्होंने शादी के कार्यक्रम की जगह पूछी, तो ठग ने कहा नवांशहर के पास। लेकिन जब सरबजीत सिंह नवांशहर पहुंचे और संपर्क किया, तो फोन बंद मिला। इलाके में पूछताछ करने पर लोगों ने बताया कि यहां कई सालों से सामूहिक विवाह कार्यक्रम नहीं हुए हैं।