पर्यटन सीजन को देखते हुए चारदीवारी क्षेत्र में ई-रिक्शा पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध के बाद भी ट्रैफिक व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। 10 जनवरी तक ई-रिक्शा को चारदीवारी से बाहर कर दिया गया, लेकिन उनकी जगह ऑटो ने ले ली। हालात यह हैं कि पहले जहां ई-रिक्शा चलते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में ऑटो दिखाई दे रहे हैं। नतीजतन जाम और अव्यवस्था की समस्या बनी हुई है। ट्रैफिक पुलिस ने परकोटे में खाली ऑटो की एंट्री रोकने का प्रयास किया, लेकिन जो ऑटो एक बार भीतर प्रवेश कर गया, वह बाहर निकलने का नाम नहीं ले रहा। इससे छोटी चौपड़, बड़ी चौपड़ और आसपास के बाजारों में लगातार जाम की स्थिति बन रही है। छोटी दूरी का सफर अब महंगा दैनिक भास्कर संवाददाता ने छोटी चौपड़ से बड़ी चौपड़ होते हुए जल महल तक ऑटो बुक किया। यह करीब 5 किलोमीटर का सफर है। इतना ही नहीं, ऑटो चालक रास्ते में दो से तीन सवारी और बैठाने के लिए जगह-जगह रुकते हैं। सड़कों के किनारे पार्किंग के बाद केवल 4 फीट तक जगह बचती है। ऐसे में जब ऑटो बीच सड़क पर रुकते हैं तो पीछे लंबा जाम लग जाता है। ई-ऑटो पर भी नियंत्रण नहीं शहर में ई-रिक्शा के संचालन को लेकर जोन निर्धारित कर दिए गए हैं, लेकिन ऑटो जैसे अन्य सवारी वाहनों के लिए अब तक कोई रूट या जोन तय नहीं किया गया है। यही वजह है कि ई-रिक्शा हटने के बाद ऑटो उसी क्षेत्र में सक्रिय हो गए और ट्रैफिक दबाव बढ़ गया। ई-रिक्शा जितने ही ऑटो चारदीवारी क्षेत्र में पहले रोजाना करीब 9,000 ई-रिक्शा संचालित हो रहे थे। अब उनकी जगह लगभग 4,000 ऑटो चारदीवारी में नजर आने लगे हैं। ये वही ऑटो हैं, जो पहले चारदीवारी के बाहर चलते थे। कई ऑटो चालक, जो पहले केवल रात में चलते थे, अब दिन में भी चारदीवारी में सक्रिय हो गए हैं। परकोटे में सिर्फ 250 ई-रिक्शा को अनुमति डीसीपी ट्रैफिक सुमित मेहरड़ा के अनुसार, शहर में संचालित करीब 30 हजार ई-रिक्शा को 7 जोन में बांटकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। संचालन को नियमित करने के लिए क्यू-आर कोड अनिवार्य किया है। सबसे अधिक पश्चिम जोन में 9,000 ई-रिक्शा (हरा रंग) चल सकेंगे, जबकि परकोटा क्षेत्र में केवल 250 ई-रिक्शा को ही संचालन की अनुमति दी गई है।