जयपुर नगर निगम ने यूडी टैक्स जमा नहीं करवाने पर शहर के दो बड़े होटल ग्रुप पर कार्रवाई की। 2 घंटे बाद होटल मैनेजमेंट ने बकाया यूडी टैक्स जमा करवा दिया। इस पर निगम ने सील की सम्पत्तियों को खोल दिया। मालवीय नगर जोन एरिया में सोमवार को रेवेन्यू टीम ने जवाहर सर्किल के पास होटल मैरियट पर कार्रवाई की। ग्रुप का 5.97 करोड़ रुपए का टैक्स बकाया होने पर सुबह होटल के बाहर बने लग्जरी कार शोरूम और एक रेस्टोरेंट पर कुर्की करते हुए उनको सील कर दिया। इसी तरह टीम ने राजापार्क स्थित होटल रमाडा पर भी कार्रवाई की। इस ग्रुप पर 1.36 करोड़ रुपए का यूडी टैक्स बकाया चल रहा था। इसके चलते टीम ने होटल ग्रुप की कुछ सम्पत्तियों को सील किया। बकाया टैक्स जमा करवाने पर छोड़ी सम्पत्ति मालवीय नगर जोन उपायुक्त मुकुट सिंह के मुताबिक होटल रमाडा और मैरियट ग्रुप मैनेजमेंट ने कार्रवाई के करीब 2 घंटे बाद नगर निगम दफ्तर आकर बकाया टैक्स राशि का चैक जमा करवाया। इसके बाद इन दोनों ही ग्रुप की सील की गई सम्पत्तियों को खोल दिया गया। 19 साल का बकाया था टैक्स मालवीय नगर जोन के राजस्व अधिकारी पवन मीणा ने बताया- मैरियट होटल के बाहर बने कार शोरूम, रेस्टोरेंट के होटल प्रबंधन ने साल 2007 से यूडी टैक्स जमा नहीं करवाया था। इसके लिए उसे कई बार नोटिस दिए, लेकिन जमा नहीं करवाया। आज जब सम्पत्ति को सील किया तो टैक्स जमा करवाया गया। इसी तरह होटल रमाडा के टैक्स को लेकर लंबे समय से विवाद था, जिसके कारण होटल प्रबंधन ने टैक्स जमा नहीं करवाया था। होटल प्रबंधन यूडी टैक्स औद्योगिक रेट से देने के लिए कह रहा था, लेकिन नगर निगम ने इसे कॉमर्शियल की दर से डिमांड लेटर जारी कर रखा था। इस होटल का भी 2007 से टैक्स बकाया था। क्या है यूडी टैक्स नगरीय निकायों क्षेत्रों में मौजूद अचल सम्पत्तियों पर ये टैक्स हर साल वसूला जाता है। ये टैक्स इन शहरी सरकारों के रेवेन्यू का एक बड़ा स्रोत है। निकायों की ओर से दी जाने वाली मूलभूत सुविधाओं (सड़क, सीवरेज समेत अन्य सुविधाओं के रखरखाव और विकास) को देने की एवज में वसूला जाता है। आवासीय भूखंडों पर ये टैक्स 300 वर्गमीटर से बड़े भूखंडों से लिया जाता है। जबकि हर कॉमर्शियल सम्पत्तियों, होटल, शिक्षण संस्थान, कोचिंग सेंटर, हॉस्पिटल समेत अन्य इंस्टीट्यूशनल सम्पत्तियों से अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से अलग-अलग दर से वसूला जाता है।