जयपुर। राजधानी के बढ़ते शहर और बढ़ती आबादी के बावजूद पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साधन पीछे छूटते जा रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे शहर की बसें अपनी क्षमता भूल गई हों। 22 सीटर मिनी बसों में 60-70 यात्री खड़े-सफर कर रहे हैं और बड़े बसों में भी लोग खड़े होने को मजबूर हैं। हर रोज लोग घंटों बस का इंतजार करते हैं, और जैसे ही बस आती है, एक-दूसरे पर चढ़कर सफर शुरू हो जाता है।