शहर में छोटी उम्र के बच्चे भी अनजाने में साइबर दुराचार का हिस्सा बनते जा रहे हैं। पुलिस और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के पास पहुंच रहे मामलों में सामने आया है कि कई छात्र परिणाम सोचे-समझे बिना अपने ही मोबाइल से टीचर्स के नाम पर फेक सोशल मीडिया अकाउंट बना रहे हैं, तस्वीरों और वीडियो को एआई की मदद से एडिट कर पोस्ट कर रहे हैं या फिर गुमनाम अकाउंट से अभद्र टिप्पणियां लिख रहे हैं। बच्चे इसे मजाक या गुस्सा निकालना समझते हैं, जबकि कानून इसे गंभीर अपराध मानता है। विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना काल के बाद ऐसे मामलों में उछाल आया है। ऑनलाइन क्लासेस के दौर में बच्चों के हाथ में मोबाइल और इंटरनेट तो आ गया, लेकिन डिजिटल जिम्मेदारी और कानूनी समझ नहीं आ सकी। कई मामलों में स्कूल अपनी छवि और स्टैंडर्ड बनाए रखने को बात पुलिस तक नहीं जाने देते। स्कूल स्तर पर ही पेरेंट्स बुलाकर माफीनामा लिखवा छोड़ दिया जाता है। एक ऑनलाइन गलती, पूरे भविष्य पर भारी पड़ सकती है विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे मामलों में सिर्फ सजा देना समाधान नहीं है। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि फेक आईडी बनाना, किसी की फोटो या वीडियो से छेड़छाड़ करना और आपत्तिजनक कंटेंट शेयर करना कानूनी जुर्म है। पेरेंट्स की भूमिका सबसे अहम है। असली निगरानी घर से ही शुरू होती है। बार-बार नहीं हटने पर समय रहते काउंसलिंग की जरूरत होती है, ताकि उनके भीतर छिपी भावनात्मक समस्याओं को समझा जा सके।​ सही मार्गदर्शन, निगरानी और समझ के जरिए ही बच्चों को साइबर अपराध के दलदल में फंसने से बचाया जा सकता है. सजा नहीं, समझ और निगरानी असली समाधान है क्योंकि एक छोटी सी ऑनलाइन गलती भी उनके पूरे भविष्य पर भारी पड़ सकती है। कोरोना के बाद हर बच्चे के हाथ में मोबाइल, बिना जानकारी कर रहे साइबर अपराध केस 1 : टीचर के नाम से बनाई फेक सोशल मीडिया प्रोफाइल : आठवीं ​क्लास के एक छात्र ने अपनी ही स्कूल की महिला टीचर के नाम से सोशल मीडिया पर फेक पेज बनाया। लगातार आपत्तिजनक पोस्ट डालने की जानकारी टीचर को एक सहयोगी से मिली। जांच में छात्र की भूमिका सामने आई और मामला पेरेंट्स तक पहुंचा। पूर्व में अनुशासनहीनता के रिकॉर्ड के बाद मैनेजमेंट ने छात्र को स्कूल से निकाल दिया। केस 2 : टीचर की वीडियो पर वल्गर गाना जोड़कर बनाया फैन पेज : 13 साल के एक छात्र ने अपने टीचर का फैन पेज बनाया। उसने टीचर की वीडियो पर वल्गर गाना जोड़कर पोस्ट कर दिया। स्कूल मैनेजमेंट ने पेरेंट्स को बुलाकर न सिर्फ कड़ी चेतावनी दी। बल्कि माफीनामा लिखवाया गया। केस 3 : एकतरफा पसंद का गुस्सा सोशल मीडिया बदनामी में बदला : एक छात्र क्लासमेट को पसंद करता था, लेकिन वह किसी अन्य छात्र की क्लोज फ्रेंड थी। नाराज छात्र ने बदला लेने के इरादे से दूसरे छात्र के नाम से सोशल मीडिया पेज बना दिया। गलत फोटो अपलोड की गई और वॉयस मैसेज के जरिए अपमानजनक बातें फैलाई गईं। शिकायत मिलते ही कंटेंट हटवाया गया और छात्र की काउंसलिंग कराई गई। केस 4 : एआई एडिटिंग से टीचर की आवाज और छवि से की छेड़छाड़ : एक छात्र को अपनी क्लास टीचर पसंद नहीं थीं। उसने एआई तकनीक का इस्तेमाल कर टीचर के वीडियो में ऐसी एडिटिंग कर दी, जिससे लगे कि टीचर खुद अपने बारे में आपत्तिजनक बातें कह रही हैं। केस 5 : पिटाई से नाराज छात्र ने टीचर के खिलाफ बनाई फेक आईडी: ग्रामीण क्षेत्र के एक आठवीं क्लास के छात्र को टीचर की पिटाई का गहरा आघात लगा। गुस्से में उसने टीचर के खिलाफ फेक सोशल मीडिया आईडी बना ली और लिखने लगा कि टीचर बच्चों को मारता है। मामला बढ़ने पर पुलिस भी बीच में आई। बाद में आपसी सहमति से समझौता हुआ।