पंजाब के पूर्व CM चरणजीत सिंह चन्नी लगातार आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार को घेरने में जुटे हैं। चन्नी ने अब सरकार को नशे के मुद्दे पर घेरा है। उन्होंने 2 लोगों से बातचीत कर नशे की डिलीवरी का वीडियो जारी किया। चन्नी ने जो वीडियो जारी किया है, उसमें 2 लोग उनके साथ बैठे हैं। दोनों नशे की डिलीवरी और नशा तस्करों के संबंध में बात कर रहे हैं। वीडियो में दावा किया गया कि नशा तस्कर 10 मिनट भी नहीं, बल्कि 5 मिनट में कहीं भी नशे की डिलीवरी आज भी दे रहे हैं। नशा तस्करों के खिलाफ अगर लोग पुलिस को शिकायत देते हैं तो पहले कार्रवाई नहीं होती। अगर पुलिस पकड़ भी ले तो बाद में उन्हें छोड़ देती है। एक व्यक्ति का दावा है कि उनके रिश्तेदार की नशे से मौत हो गई थी और उन्होंने नशा तस्कर को पकड़वाया था। युवक का भोग भी नहीं पड़ा और उससे पहले तस्कर बाहर आ गया। वीडियो में पंजाब सरकार के युद्ध नशे के विरुद्ध अभियान पर भी सवाल किए गए। चन्नी के साथ बैठे युवकों का दावा है कि इस अभियान के बाद नशा बढ़ा ही है, कम नहीं हुआ। वीडियो में चन्नी की 2 लोगों की साथ हुई बातचीत के अंश चरणजीत सिंह चन्नी: तुम सरदार हो। केस रखे थे और कीर्तन भी करते थे, फिर नशा क्यों करने लगे, क्या कारण था?
जवाब (पहला व्यक्ति): मेरी जो संगति थी जो लड़के साथ पढ़ते थे। मिलकर पहले पन्नी से नशा करते थे। धीरे धीरे इंजेक्शन पर आ गए। बड़ा बुरा हाल था। चन्नी: एक बात बता कहते हैं कि टीके से नशा करने से कोई बीमारी लग जाती है क्या तेरे को भी बीमारी है?
जवाब: हां मुझे भी है। चन्नी: तुझे भी काला पीलिया है?
जवाब: जी है मुझे भी है। ये तो अब मरते दम तक रहेगा। एक दूसरे की सीरिंज यूज करते हैं। नशा करते समय इतनी तलब होती है कि बंदा दूसरे के ब्लड में घुला सामान भी लगा देता है। दूसरा अगर इंजेक्शन लगा रहा होता है तो उसकी सीरिंज को बाहर खींचकर खुद पर लगा देते हैं। इतना बुरा हाल है। चन्नी: खून वाला ही लगा देते हैं तुझे तो नहीं कोई बीमारी?
जवाब (दूसरा व्यक्ति): नहीं मुझे नहीं कोई बीमारी नहीं। चन्नी: तुम काला पीलिया की कोई दवाई ले रहे हो?
जवाब (पहला व्यक्ति): नहीं जी कोई दवाई नहीं ले रहा। चन्नी: सेहत को मरने पर छोड़ा हुआ है अब?
जवाब: जी। चन्नी: तुझे काला पीलिया का पता चल गया तो दवाई लेने क्यों नहीं जाता?
जवाब: नशा की वजह से। जब तक नशा नहीं छोड़ा तब तक दवाई लेने का फायदा नहीं। दवाई ले भी ली तो फिर दोबारा इंजेक्शन लगाकर फिर हो जाएगा। दवाई लेने का क्या फायदा। चन्नी: नशे में कितना खर्च हो जाता है तुम्हारा?
जवाब: रोज का 1500 से 2000 रुपए। चन्नी: 1500-2000 रुपए डेली नशे पर?
जवाब: साथ वाले लड़के होते हैं जी वो कहते हैं आधा पैसे हम दे देते हैं। चोरियां करते हैं। तीन लोग 1500 रुपए इकठ्ठा करते हैं और फिर नशा लेकर आते हैं। चन्नी: मतलब 15 हजार रुपए प्रति महीना नशे का खर्च है तुम्हारा?
जवाब: मेरे साथ का एक लड़का मेरे सामने इंजेक्शन लगाकर मर भी गया। चन्नी: वो कैसे मरा?
जवाब: मैंने उसका हाथ पकड़ा। उसने इंजेक्शन लगाया। नशा उसके ब्लड़ में गया और साथ के साथ उसे अटैक आ गया और मर गया। उसकी उम्र 18 साल थी। उसके बर्थ डे की पार्टी थी। चन्नी: उसके बर्थ डे की पार्टी थी। जन्म दिन मनाते हुए नशा किया टीका लगाया और मर गया। उसके बाद उसका क्या किया घर ले गए?
जवाब: उठाकर ले गए जी क्या करते। छोड़कर भी नहीं जा सकते थे। उसे घर ले गए और उसके घर में बताया कि हम नशा कर रहे थे। बताया तो घर के लोगों ने हमें पीटा। वो मेरी बुआ का बेटा था। चन्नी: वो तेरी बुआ का बेटा था मतलब तू उसके मामा का बेटा है। तेरे हाथों ही मर गया।
जवाब: जी मोटर पर। चन्नी: इसमें सरकारों का और पुलिस का कितना रोल है। डरो मत सही बताओ?
जवाब: दो लोगों को मैंने उठवाया था। वो 10 से 15 दिन में बाहर आ गए। फिर क्या फायदा जी। क्या पुलिस उनके साथ मिली हुई है। कई बार कई तस्करों को गिरफ्तार करवाया। जब मेरी बुआ का बेटा मरा तो वो बंदे उठवाए थे। उसका भोग भी नहीं हुआ और वो बाहर आ गए। चन्नी: यानी सरकारें ही बिकवाती हैं चिट्टा? ऐसे नहीं सरेआम बिकता?
जवाब: जी बिल्कुल। चन्नी: तुम्हारे साथ इतना कुछ हुआ तो खुद छोड़ने की इच्छा नहीं हुई।
जवाब: कोशिश करते हैं लेकिन फोन आ जाते हैं।
दूसरा व्यक्ति: सब्जी की तरह तो अब चिट्टा बिकता है। जहां मर्जी चले जाओ वहां मिलता है। चन्नी: जहां से मर्जी ले लो?
जवाब (पहला व्यक्ति): अभी फोन कर लो अभी देने आ जाएंगे। घर पर देने आ जाते हैं। चन्नी: फिर पुलिस नहीं पकड़ती इनको।
जवाब (दूसरा व्यक्ति): पुलिस पकड़ती है और छोड़ देती है। सिर्फ दिखावा करती है। चन्नी: दिखावा करती है। तू नशे पर कैसे लगा?
जवाब: मैं कॉलेज में पढ़ता था जी दोस्तों के साथ लग गया। चन्नी: कॉलेज में लग गया था। कॉलेज में तेरे कितने दोस्त नशा करते थे।
जवाब: बहुत हैं जी। हमारे पास जितने पैसे होते हैं नशे में उड़ा देते हैं। चन्नी: नशे के लिए पैसे कहां से आते हैं, काम क्या करता है?
जवाब: घर के लोग ही पैसे देते हैं। नशे पर 1500 से 2000 रुपए रोज खर्च करना पड़ता है। नहीं तो मरने वाले हालात हो जाते हैं। पागल हो जाते हैं नहीं तो। चन्नी: नशा करके क्या हो जाता है फिर? नशा न करें तो हालात डामाडोल हो जाते हैं?
जवाब: जैसे रोटी नहीं छोड़ सकते वैसे ही हम नशा के बिना भी नहीं रह सकते। चन्नी: तेरे जो दोस्त नशा करते हैं उनका कोई नुकसान तो नहीं हुआ?
जवाब: मेरे कई यार दोस्त ऊपर चले गए। तीन चार मर चुके हैं। कोई बाथरूम में ओवरडोज लगाकर मर गया तो कोई नशा छुड़ाओ केंद्र से आया और बाहर आकर डोज लगाई तो मर गया। एक लड़के ने डोज लगाई तो पहले उसे दिखना बंद हो गया। फिर उसके दिमाग की नशें फट गई और उसकी डेथ हो गई। चन्नी: तेरा मन नहीं करता है नशा छोड़ने का।
जवाब: मेरा मन करता है अब कभी कभी लगाता हूं। चन्नी: अगर तेरे को नशा लेना हो यहां पर तो कितनी देर में मिल सकता है?
जवाब: 10 मिनट में मिल जाएगा, दस मिनट ज्यादा है। चन्नी : पांच मिनट में मिल जाएगा। नशा मिलना इतना आसान है।
जवाब: जी, पांच मिनट में आ जाता है। आगे से आगे लिंक बन जाते हैं। फिर होम डिलीवरी भी मिल जाती है। बच्चे बच्चे को मिल जाता है अब तो। चन्नी: सरकार ने जो कहा युद्ध नशे के विरुद्ध, इसका कोई फर्क पड़ा तुम्हें नशा मिलने में।
जवाब (पहला व्यक्ति): ये तो बढ़ गया जी। कम कुछ नहीं हुआ। पहले एक ग्राम लेते थे 3500 से 4000 रुपए में। अब तो 2000 में मिलने लग गया है। चन्नी: तुम नशा छोड़कर उन लोगों को पकड़वाना शुरू करो ताकि लोगों की जान न जाए।
जवाब: जी हम चाहते हैं इसीलिए आपके पास आए हैं। चन्नी: तेरे गांव में कितने लोग नशा करते हैं?
जवाब (पहला व्यक्ति): मेरे गांव में 98 फीसदी लड़के नशा कर रहे हैं। सभी 15 से 21 साल के बीच के हैं। 25 साल से ऊपर तो जा ही नहीं रहे। मर जाते हैं। चन्नी: नशे को कैसे खत्म कर सकते हैं?
जवाब: पत्ते तोड़ने से कुछ नहीं होगा। पेड़ पर पत्ता टूटने से फर्क नहीं पड़ता। पेड़ को जड़ से उखड़ने की जरूरत है। पंजाब सरकार के युद्ध नशियां विरुद्ध अभियान को जानिए… पंजाब सरकार ने युद्ध नशियां विरुद्ध अभियान को व्यापक स्तर पर लागू किया है, जिसने जनवरी 2026 से अपने दूसरे चरण में प्रवेश कर लिया है। सरकार ये नए प्रयास भी कर रही…
