चंडीगढ़ में पिता सुमेई लाल की हत्या के आरोप में दो साल जेल काट चुकी उसकी बेटी आशा को डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने बरी कर दिया है। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए चंडीगढ़ पुलिस को भी लचर इन्वेस्टिगेशन करने पर फटकार लगाई। साथ ही टिप्पणी तक की कि जांच के दौरान तथ्यों को सही तरीके से परखना जरूरी होता है। इस मामले में पुलिस ने ऐसा नहीं किया, यह गंभीर सवाल खड़े करता है। कोर्ट के इस फैसले के बाद समाज में पिता की हत्यारोपी बेटी का ताना सुनने वाली बेटी बेगुनाह होकर घर लौटी तो कई सवाल उठ रहे है। सबसे पहला और मुख्य सवाल तो यदि बेटी ने पिता की हत्या नहीं की तो फिर किसने की। दूसरा सवाल क्या पुलिस ने केवल पड़ोसी की गवाही को ही इस पूरे केस का आधार बनाया। फोरेंसिक रिपोर्ट से लेकर पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मर्डर वेपन से लेकर वार करने की संख्या तक, किसी भी पहलू को अच्छे से नहीं परखा। इसका जवाब बेटी के निर्दोष साबित होकर घर लौट आने पर उसकी मां मालती देवी देती हैं। मालती देवी बतातीं हैं है कि पुलिस ने इस पूरे केस को केवल 1 ही थ्योरी पर खड़ा कर दिया और वो थी पड़ोसी गुलाब सिंह की गवाही। जबकि उसके पति की मौत हत्या नहीं, एक हादसा थी। मैं और मेरी बेटी आशा सहित चार बच्चे पुलिस के सामने खूब गिड़गिड़ाए कि यह हादसा है, हत्या नहीं है, लेकिन पुलिस ने एक नहीं सुनी। दैनिक भास्कर एप की टीम ने इस केस से जुड़े वकील, युवती आशा की मां से बात की। साथ ही पुलिस इन्वेस्टिगेशन पर खामियों पर नजर डाली तो कई बातें सामने आई। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले 3 पॉइंट में जानिए क्या था पूरा मामला… 10 अगस्त को क्या हुआ था, आशा की मां ने 4 बातें बताईं.. कोर्ट में वकील के ये दलीलें बनी रिहाई की वजह सवाल- नुकसान की भरपाई कौन करेगा
अब जबकि कोर्ट ने आशा को बेगुनाह मानते हुए बरी कर दिया है, परिवार यही सवाल उठा रहा है कि आशा के जीवन के 2 साल 2 महीने कौन लौटाएगा। क्या इसकी जिम्मेदारी पुलिस की है या उस गवाह की, जिसकी झूठी गवाही की वजह से एक बेगुनाह बेटी को जेल जाना पड़ा। —————- ये खबर भी पढ़ें चंडीगढ़ में 2 साल जेल काटकर बेगुनाह निकली बेटी:पिता के ही मर्डर केस में कैद थी; कोर्ट में मुख्य गवाह पलटा, पुलिस को लगी फटकार चंडीगढ़ में पिता की हत्या के आरोप में गिरफ्तार बेटी आशा को चंडीगढ़ जिला अदालत ने 2 साल बाद बरी कर दिया है। केस के मुख्य गवाह के बयान से मुकरने के बाद ये फैसला आया। कोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए और कहा कि जब कोई गवाह ही नहीं था तो जबरन बेटी को क्या जेल में रखा। (पूरी खबर पढ़ें)
