राजस्थान में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा- उत्तरप्रदेश (यूपी) में कदम रखने पर हमें जान से मारने की धमकी मिल रही है। हम गोमाता की रक्षा की बात करेंगे, तो मार देंगे। उन्होंने कहा- आज शास्त्रों की जगह सर्कुलर के अनुसार हिंदुत्व का पालन हो रहा है। सरकारें आज खुद धर्माचार्य होना चाहती हैं। जबकि हिंदू धर्म में राजा और धर्माचार्य अलग-अलग होता था। ये हिंदू धर्म की परंपरा को नष्ट करना चाहते हैं, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों कोटा आए हुए हैं। शनिवार को उन्होंने भास्कर से सनातन, हिंदू धर्म, सरकार और संतों के टकराव और उन्हें मिल रही धमकियों पर खुलकर बात की। पढ़िए- शंकराचार्य से हुई बातचीत… सवाल- सनातन धर्म की आज क्या स्थिति है, क्या देश में धर्म मजबूत हो रहा है या चुनौतियां हैं? शंकराचार्य- सनातन धर्म की जो शिक्षाएं हैं, वह वेदों से, वेदानुसारी पुराणों-स्मृतियों और अन्य साहित्य से प्राप्त होती है। आज का जो तथाकथित हिंदुत्व है, वह शास्त्रों के अनुसार अपने हिंदू धर्म का पालन नहीं कर रहा है। वह सर्कुलर के अनुसार पालन कर रहा है। सर्कुलर के अनुसार अगर हिंदू चलेंगे तो इनका रखवाला कोई नहीं होगा। शास्त्रों के अनुसार जो हिंदू चलेगा, वही असली हिंदू माना जाएगा। सवाल- धर्म युद्ध बोर्ड की बात आपने कही है, क्या ये बड़ा आंदोलन बनने जा रहा है? शंकराचार्य- शुरुआत तो हो चुकी है। अब ये भविष्य पर निर्भर करता है कि इसमें शामिल लोग कितना गहरा प्रयास करते हैं। उसके अनुसार ही परिणाम आएंगे। सवाल- क्या आपकी बात को दबाने की कोशिश हो रही है? हाल में धमकी भी मिली? शंकराचार्य- एक के बाद एक हमले किए जा रहे हैं। कभी मुकदमा लगा देते हैं, कभी लांछन लगाते हैं और कभी मारने की धमकी दी जाती है। हमलों से डरकर चुप हो जाना तो सही नहीं है। हम ऐसा क्या कर रहे हैं। हम यही तो कह रहे हैं कि जो हमारे शास्त्रों में लिखा है। वह हमारे व्यवहार में होना चाहिए। अगर हमारे शास्त्रों में लिखा है कि गाय हमारी मां है तो उसे पशु क्यों कहा जा रहा है? हमारी ही ओट लेकर हमारी मां की बोटी-बोटी करके बेचने का अधिकार कैसे मिल गया। सवाल- क्या सनातन, धर्म स्थलों को सरकारें चला रही हैं? शंकराचार्य- हां, सरकारों की कोशिश हो चुकी है। वह भी खुद धर्माचार्य होना चाहते हैं। जैसे ईसाई धर्म के पोप राष्ट्राध्यक्ष भी हैं, वेटिकन सिटी में पोप ही राष्ट्राध्यक्ष हैं, साथ ही धर्माचार्य भी हैं। मुस्लिमों में जो खलीफा होते हैं, वह राष्ट्राध्यक्ष भी होते हैं और धर्माचार्य भी होते हैं। ऐसे ही ये लोग हिंदू धर्म में ला रहे हैं कि जो राजा होगा, वहीं धर्माचार्य होगा, जबकि हिंदू धर्म में राजा अलग और धर्माचार्य अलग होता था। ये हिंदू धर्म की परंपरा को नष्ट करना चाहते हैं। इसे कैसे स्वीकार कर सकते हैं। धर्म की कमान संतों के हाथ में ही होनी चाहिए। देश की जो दूसरी बातें हैं, वह राजनीतिज्ञों के हाथ में हो जैसे शिक्षा, स्वास्थ, सुव्यवस्था उनके हाथ में हो। धर्म का मामला, धर्माचार्य के हाथ में होना चाहिए। धर्माचार्यों का काम भी नेता करेगा तो धर्माचार्य क्या व्यर्थ है? धर्माचार्य तो धर्म को पढ़ता है। उसके बाद उसे जी कर देखता है कि धर्म की बातें जो लिखी हैं। वह जीवन के लिए सही है या नहीं। फिर उसे अगली पीढ़ी को बताता है। राजनेता को कब धर्म पढ़ने का मौका मिलेगा और कब उसे जी कर उसका टेस्ट करने का मौका मिलेगा। नेता के पास तो घर के लिए समय नहीं है। सवाल- प्रयागराज स्नान मामले को क्या मानते हैं- प्रशासनिक कार्रवाई, चूक या सरकारी दबाव? शंकराचार्य- प्रशासन की चूक होती तो प्रशासन जस्टीफाई करता, लेकिन वह नहीं कर पाया। प्रशासन ने भी कोई जांच नहीं करवाई और न कार्रवाई की। इसके बाद वहां सीएम ने सदन में खड़े होकर ठप्पा लगा दिया कि मेरे अनुसार ही सब कुछ हुआ। इसमें कुछ छिपा नहीं है। सवाल- इस विवाद के बाद भी काफी विवाद हुए, मुकदमा भी हुआ? शंकराचार्य- एक के बाद एक मुकदमा किया, गंदे लांछन लगाए और अब मारने की धमकी दे रहे हैं कि यूपी की यात्रा की तो मारकर फेंक दिया जाएगा। सनातन धर्म की बात उठाने पर ये धमकियां मिल रही है। हम कह क्या रहे हैं, गोमाता की रक्षा होनी चाहिए। क्या गोमाता की रक्षा की बात करने वाले को मार देंगे। एफआईआर तक नहीं लिखी जा रही है। वो भी बात कर रहे हैं। हम इससे इनकार नहीं कर रहे हैं, लेकिन काम कहां करते हैं। जब आप लगातार सत्ता में हो तो बात क्यों करनी है। अब तो काम करके दिखाना है, लेकिन अभी भी सिर्फ बात ही कर रहे हैं। सत्ता में लंबा समय बीत गया। हमसे कहा कि गोमाता की रक्षा करेंगे तो हमने वोट दिया, लेकिन सिर्फ बात ही करोगे तो कैसे चलेगा। सवाल- योगी आदित्यनाथ भी तो संत हैं? शंकराचार्य- वे काई के संत हैं। कोई भी संत होगा तो क्या वह अपनी देख-रेख में पशु हत्या करवाएगा, मांस का व्यापार करेगा। संत तो छोड़ दो, मोहल्ले के मंदिर का पुजारी भी ये काम नहीं करता है। असली हिंदू तो मच्छर मारने में भी संकोच करता है। घर में मच्छर-चूहे आ जाते हैं तो मारने की बजाय दवाई लेकर आते हैं कि वे घर से भाग जाए। ये असली हिंदू सोच है। जो करोड़-करोड़ पशुओं को काट-काटकर डॉलर पाने के लिए बिक्री कर रहा है, व्यापार कर रहा है, उसके बाद भी उसे क्या कहें। ये गलत हो रहा है, हिंदू धर्म की परिभाषा बदली जा रही है। अगर इस तरह से गेरुआ कपड़ा पहने लोग नौकरी करेंगे, सांसारिक पदों को धारण करेंगे, इस तरह से हिंसा को बढ़ावा देंगे तो साधु-संन्यासी का क्या मतलब रह जाएगा।
