कोचिंग सिटी कोटा में गैस सिलेंडर की किल्लत अब बड़ा संकट बनती जा रही है। इसका सीधा असर हजारों स्टूडेंट्स के खाने के सिस्टम पर पड़ रहा है। शहर के कई मेस और हॉस्टलों में गैस सप्लाई बाधित होने से नाश्ता बंद करना पड़ा है, जबकि खाना बनाने के लिए अब लकड़ी और कोयले की भट्टियों का सहारा लिया जा रहा है। अचानक बढ़ी मांग के कारण भट्टी बनाने वाले कारीगरों के पास ऑर्डर की बाढ़ आ गई है। कोटा में देशभर से लाखों छात्र पढ़ाई के लिए आते हैं और इनमें से बड़ी संख्या मेस और हॉस्टलों पर निर्भर रहती है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से गैस सिलेंडर की कमी के कारण मेस संचालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मेस में सुबह का नाश्ता, 1 सब्जी बंद कर दी गई है, जबकि दोपहर और रात के खाने के लिए अस्थायी इंतजाम किए जा रहे हैं। संचालकों का कहना है कि सिलेंडर समय पर नहीं मिलने से पूरा सिस्टम बिगड़ गया है। गैस की कमी के बीच अब शहर में लकड़ी और कोयले की भट्टियों की मांग अचानक बढ़ गई है। भट्टी बनाने वाली दुकानों पर भीड़ लगी हुई है और कारीगर लगातार ऑर्डर पूरे करने में जुटे हैं। मेस और हॉस्टलों के लिए 35 किलो, 40 किलो और बड़े साइज की भट्टियां तैयार की जा रही हैं। भट्टी की दुकान चलाने वाले जब्बार ने बताया कि पिछले दो से तीन दिनों में ही 40 से ज्यादा नए ऑर्डर मिल चुके हैं। पहले से करीब 45 भट्टियां दे चुके हैं, लेकिन मांग इतनी ज्यादा है कि समय पर सप्लाई करना मुश्किल हो रहा है। हॉस्टल और मेस संचालकों का कहना है कि गैस सिलेंडर नहीं मिलने से रोज का खाना बनाना मुश्किल हो गया है। कई जगह मजबूरी में घर के गैस सिलेंडर मेस में लगाकर काम चलाया जा रहा है। हॉस्टल संचालक अर्जुन सिंह ने बताया कि अब भट्टियां खरीदनी पड़ रही हैं, लेकिन अगर लंबे समय तक यही स्थिति रही तो लकड़ी और कोयले के दाम भी बढ़ सकते हैं। वही कई इलाकों में मैस और रेस्टोरेंट बंद हो चुके हैं। गैस की किल्लत का असर उन परिवारों पर भी पड़ रहा है जो कोटा में बच्चों के साथ रह रहे हैं। कई अपार्टमेंट्स में घरेलू सिलेंडर मिलना भी मुश्किल हो गया है, जिससे रोजमर्रा का काम प्रभावित हो रहा है।