दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान विधिपुर आश्रम में साप्ताहिक सत्संग श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ करवाया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और गुरुचरणों में अपना प्रेम और आस्था प्रकट की। इस मौके पर गुरुदेव आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी त्रिनयना भारती ने गुरु महिमा का गुणगान किया। साध्वी ने कहा कि गुरु ही वह दैवीय शक्ति हैं, जो मानव जीवन से अज्ञान का अंधकार मिटाकर आत्मज्ञान के प्रकाश में पहुंचाता है। जीवन में भले ही कितनी भी उन्नति हो जाए, यदि मनुष्य अपने आत्मस्वरूप को नहीं जानता, तो उसका जीवन अपूर्ण रहता है। उन्होंने कहा कि सच्चे गुरु की शरण में आकर और उनके द्वारा प्रदत्त ब्रह्मज्ञान को धारण कर ही मनुष्य वास्तविक शांति, आनंद और जीवन का परम उद्देश्य प्राप्त कर सकता है। साध्वी ने आगे बताया कि आज का मानव बाहरी संसार में खोकर अपने भीतर की शक्ति और पवित्रता को भूलता जा रहा है। गुरु ही वह मार्गदर्शक हैं, जो साधक को भीतर की यात्रा करवाते हैं और उसे उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित कराते हैं। ब्रह्मज्ञान केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभूति है, जो मनुष्य के जीवन को संपूर्णता से परिवर्तित कर देती है। कार्यक्रम में भक्ति संगीत, मधुर भजन, सामूहिक कीर्तन और ध्यान से पूरे वातावरण में दिव्यता और शांति की अनुभूति हुई। आयोजन के अंत में साध्वी जी ने सभी भक्तों को सद्गुरु के संदेशों को जीवन में अपनाने, सेवा-साधना में निरंतर लगे रहने और ब्रह्मज्ञान के मार्ग पर दृढ़ता से आगे बढ़ने का आह्वान किया। साध्वी त्रिनयना।
