अदरीस खान @ हनुमानगढ़. अब गीगलिया माने छोटे बच्चे मायड़ बोली के शब्दों की समझ के मामले में लुडगर मतलब नासमझ नहीं रहेंगे। हर जिले में वहां के विद्यार्थी अपनी मायड़ बोली से और गहराई से परिचित हो सकेंगे। क्योंकि इस दिशा में राजस्थान राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, उदयपुर ने कवायद शुरू कर रखी है। इसके तहत ही राजस्थानी भाषा के जानकारों ने हनुमानगढ़ जिले की प्रमुख बोली बागड़ी के शब्दों का चयन कर उनकी सूची बनाई है।जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) हनुमानगढ़ के सहयोग से मायड़ भाषा के 10 जानकारों ने इस कार्य को अंजाम दिया है। शब्दों की सूची राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद को भेजी जा चुकी है। अब परिषद स्तर पर उनका उपयोग कर पाठ्यक्रम में इस तरह शामिल किया जाना है कि प्रदेश के सभी जिलों के विद्यार्थी अपने ठेठ देशी शब्दकोश के ज्ञान में इजाफा कर सकें।
