पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं की हालत बिगाड़ने और राजस्थान के हेल्थ मॉडल को धराशायी करने का आरोप लगाया है। 18 मार्च को ‘राजस्थान युवा शक्ति दिवस’ कार्यक्रम में सीएम भजनलाल शर्मा ने गहलोत पर तंज कसते हुए कहा था कि आप दिल्ली जाते थे तो दोनों पैरों में पट्टी बांध लेते थे। अब गहलोत ने एक्स पर पोस्ट करके पलटवार करते हुए लिखा- जब मैं सोशल मीडिया के माध्यम से जनता की इन बुनियादी समस्याओं को उठाता हूं, तो मुख्यमंत्री समाधान निकालने की जगह अपने इवेंट्स में मुझ पर व्यक्तिगत कमेंट्स करने में व्यस्त रहते हैं। मजबूत स्वास्थ्य ढांचा आज उपेक्षा का शिकार होकर दरक रहा गहलोत ने लिखा- राजस्थान का मजबूत स्वास्थ्य ढांचा आज उपेक्षा का शिकार होकर दरक रहा है। यह बेहद चिंताजनक है कि हमारी कांग्रेस सरकार के बनाए हुए विश्वस्तरीय हेल्थ मॉडल को वर्तमान सरकार धराशाई कर रही है। RGHS के अंतर्गत बकाया भुगतान न होने के कारण एक बार फिर निजी अस्पतालों ने ओपीडी और फार्मेसी सेवाएं रोकने की तैयारी कर ली है, जिससे कर्मचारी और पेंशनर्स अधर में हैं। साथ ही, चिरंजीवी (MAA) योजना को शिथिल कर प्रदेशभर के अस्पतालों में इलाज में देरी और आवश्यक दवाइयों की भारी किल्लत पैदा कर दी गई है। निजी ब्लड बैंकों पर लगी रोक हटाएं गहलोत ने लिखा- जयपुर के SMS और जनाना अस्पताल जैसे बड़े केंद्रों में खून की भारी कमी एक बड़ी ‘हेल्थ इमरजेंसी’ है, जो प्रदेशवासियों के जीवन के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। सरकार को चाहिए कि निजी ब्लड बैंकों पर लगी रोक अविलंब हटाएं ताकि मरीजों की समस्याओं का समाधान हो सके। योजनाएं रोकने पर जनता में रोष गहलोत ने लिखा- चाकसू विधानसभा क्षेत्र के 108 साल के बुजुर्ग गोलूरामजी माली ने मेरे से मिलने की इच्छा जताई, जिनसे मैं कल शाम उनके गांव जाकर मिला। वहां इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने भी चिकित्सा और स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र में रोकी गई योजनाओं को लेकर भाजपा सरकार के प्रति रोष जताया। — सीएम भजनलाल से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… सीएम का दिल्ली जाने को लेकर गहलोत पर पलटवार:बोले-आप जाते थे तो दोनों पैरों में पट्टी बांध लेते थे; हमें जुकाम-बुखार भी नहीं होता मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिल्ली दौरे को लेकर पूर्व सीएम अशोक गहलोत के सवाल पर पलटवार किया। गहलोत का बिना नाम लिए सीएम ने कहा- आप तो होटलों में सोए थे। आप जाते थे तो एक पैर में नहीं, दोनों पैरों में पट्टी बांध लेते थे। यह पट्टी दिखाती थी कि इनके बस की नहीं है जाने की। पढ़ें पूरी खबर