एटीएस टीम ने कॉम्पिटिशन एग्जाम में हाईटेक चीटिंग कराने वाली गैंग के दो मास्टर माइंड को अरेस्ट किया है। दोनों मास्टर माइंड पर जयपुर पुलिस ने 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। गुड़गांव में रहने वाली गर्लफ्रेंड के घर पहुंचने पर दोनों आरोपियों को एटीएस टीम ने प्लम्बर बनकर गिरफ्तार किया। अब दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। इस दौरान सामने आया कि पाप का प्रायश्चित करने के लिए दोनों आरोपियों ने वैष्णो देवी, महाकाल मंदिर उज्जैन और अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा की। पुलिस महानिरीक्षक (ATS) विकास कुमार ने बताया- फरार इनामी बदमाश जोगेन्द्र कुमार पुत्र महेन्द्र सिंह निवासी पिलानी (झुंझुनूं) और परमजीत कादयान पुत्र नेपाल सिंह निवासी बहादुरगढ़ हरियाणा को अरेस्ट किया है। जोगेन्द्र कुमार इलेक्ट्रिकल इंजीनियर और परमजीत कादयान कम्प्यूटर इंजीनियर है। फरार दोनों आरोपियों पर 25-25 हजार रुपए का इनाम रखा हुआ था। गुड़गांव के सेक्टर-37 में स्थित एक फ्लैट में गुरुवार सुबह दबिश देकर दोनों आरोपियों को पकड़ा गया है। दिल्ली से शुरू किया फर्जीवाड़ा कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी के दौरान दोनों दिल्ली में मिले थे। दोनों मिलकर पहले दिल्ली में फिर जयपुर के अलग-अलग इलाकों में कम्प्यूटर लैब खोली। विभिन्न ऑनलाइन कॉम्पिटिशन एग्जाम के दौरान कम्प्यूटर लैब में आब्जर्वर का काम करने लगे। दिल्ली के तिमारपुर में लम्बे समय तक कम्प्यूटर रिमोट से हैक कर फेक तरीके से पेपर सॉल्व कराने का काम करते रहे। इसके बाद नई दिल्ली के द्वारका इलाके में फर्जीवाड़ा शुरू किया। तिमारपुर थाने में परमजीत के खिलाफ लैब हैक करने का मामला भी दर्ज हुआ। दिल्ली में चिह्नित होने पर दोनों ने ठिकाना बदलने की सोच ली। जयपुर में आकर करवाने लगे ऑनलाइन एग्जाम ठिकाने बदलने के दौरान दोनों मुलाकात साई एजुकेट कंपनी के प्रतिनिधी से हुई। उसने बताया कि जयपुर में कम्प्यूटर लैब बहुत कम है। साल-2021 में अजमेर बाइपास पर रावत कॉलेज के नाम से कम्प्यूटर लैब खोली। लैब में स्पेस कम होने और स्टूडेंट ज्यादा होने से मकान मालिक ने लैब खाली करवा दी। इसके बाद मानसरोवर रीको काटा चौराहा के पास गणपति कॉलेज के नाम से लैब खोलकर विभिन्न कॉम्पिटिशन एग्जाम की ऑनलाइन एग्जाम करवाने लग गए। हाईटेक तरीकों से कराते नकल पूछताछ में सामने आया है कि हाईटेक तरीके से दोनों आरोपी क्राइम को अंजाम देते थे। ऑनलाइन एग्जाम के लिए लैब को सेंटर के तौर पर देकर विशेष एप्लिकेशन कम्प्यूटर में डाल देते थे। फिर कंप्यूटर को रिमोट से संचालित कर पेपर सॉल्व कराते थे। इसके अलावा कम्प्यूटर स्क्रीन का फोटो खींचकर पर्ची से पेपर सोल्यूशन देकर नकल करवाते थे। ऐसे करवाते थे चीटिंग, 8 लाख तक लेते सबसे पहले एग्जाम का कॉन्टैक्ट लेने वाली कम्पनियों को अपनी लैब किराए पर देते थे। लैब पर एग्जाम के दौरान अपना आदमी काम पर रख लेते थे। लैब में एग्जाम देने वाले अभ्यर्थियों से कोचिंग संस्था के संचालकों की ओर से लेन-देन की बातचीत की जाती थी। परीक्षा के स्तर के अनुसार अलग-अलग एग्जाम में 1.5 लाख से 8 लाख रुपए तक रकम ली जाती थी। पूछताछ में आरोपियों ने कई परीक्षाओं में दर्जनों अभ्यर्थियों को इसी प्रकार फर्जी तरीके से एग्जाम पास कराने की बात स्वीकार की है। नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन घोटाले का खुलासा जनवरी-2025 में नेशनल सीड्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड के कृषि प्रशिक्षु के पद के लिए एग्जाम में एटीएस की ओर से हेरिटेज वायुना सीनियर सेकेंडरी स्कूल खातीपुरा के सेंटर पर रेड डाली गई थी। पेपर सॉल्व कराने के लिए 6 कम्प्यूटर रिमोट पर ले रखे होने का भंडाफोड़ किया था। वैशाली नगर थाने में केस दर्ज कर 6 आरोपियों को अरेस्ट किया गया था। मामले में दोनों ही मास्टर माइंड फरार हो गए थे। प्लम्बर बनकर पकड़ा एटीएस टीम को करीब दो महीने पहले आरोपी परमजीत की गर्लफ्रेंड का पता चला। उसने गुड़गांव के सेक्टर-37 डी में फ्लैट किराए पर ले रखा था। किराए नामे में गर्लफ्रेंड के पति का नाम परमजीत लिखा होने पर टीम को पुख्ता ठिकाना होने का पता चला। पिछले 10 दिन से टीम फ्लैट के आस-पास ही आरोपी के आने की संभावना के चलते डेरा डालकर बैठी रही। अपार्टमेंट के संचालकों से कॉन्टैक्ट कर ई-ब्लॉक की लिफ्ट के CCTV को रिमोट पर लेकर मॉनिटरिंग शुरू की। 2 अक्टूबर की सुबह दोनों आरोपियों की लिफ्ट में लाइव फुटेज दिखी। इसमें वह 12वें फ्लोर का बटन दबा रहे थे। फ्लैट नंबर स्पष्ट नहीं होने के कारण दो जवान प्लम्बर की ड्रेस में पहुंचे। फ्लैट में टॉयलेट में पानी लीकेज की कहकर अंदर पहुंचे। दोनों आरोपियों के फ्लैट में मौजूदगी देखकर एक जवान ने कोडवर्ड में दूसरे जवान को टूल लाने के लिए कहा। इशारा समझते ही वेट कर रही टीम ने फ्लैट में दबिश देकर दोनों आरोपियों को धर-दबोचा। पापों का करके आए थे प्रायश्चित पिछले 9 महीने से फरारी के दौरान दोनों आरोपियों ने कभी-भी तीन रातें एक स्थान पर नहीं गुजारी। राजस्थान से फरार होते समय घग्घर नदी में अपने मोबाइल फेंक दिए। पाप का प्रायश्चित करने के लिए वैष्णों देवी, महाकाल मंदिर उज्जैन और अन्य धार्मिक स्थलों की यात्रा की। दिल्ली के द्वारका इलाके में अपने पुराने दोस्तों के गुप्त ठिकानों पर फरारी काटते रहे। राहगीरों के मोबाइल लेकर कभी-कभी अपने घरवालों से कॉन्टैक्ट करते थे। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वह सुबह ही महाकाल के दर्शन कर तनाव से मुक्ति की प्रार्थना करके आए थे।