शादी के बाद बंटवारे में जमीन मिली थी। खेती के लिए पानी नहीं था और न ही पूंजी। अनार का बगीचा देकर खेती का मन मनाया। भैंस बेचकर पौधे खरीदे। 17 साल में पसीना बहाकर महिला किसान ने जमीन को हरे-भरे बाग में बदल डाला। पति ने भी होम गार्ड की सरकारी नौकरी छोड़ दी। पांच बीघा जमीन पर शुरू की बागवानी (सेब, अनार, मौसमी और नींबू) से अब सालाना 40 लाख रुपए की कमाई हो रही है। दो बीघा में 18 किस्म के फलदार पौधे किए जा रहे हैं। प्रयासों को सरकार ने भी सम्मान देकर सराहा। म्हारे देश की खेती में आज कहानी सीकर की महिला किसान संतोष देवी की… दो भाई सरकारी नौकरी में सीकर जिले के बेरी गांव की रहने वाली संतोष देवी (52) ने बताया – 1990 में 15 साल की उम्र में शादी हो गई। वह पांचवीं कक्षा तक ही पढ़ाई कर पाईं। उन्होंने 12 साल की कम उम्र में ही उन्होंने खेती के हर तौर-तरीके सीख लिए थे। पति रामकरण खेदड़ 10वीं पास हैं। शादी के समय वह होमगार्ड की नौकरी करते थे। रामकरण के पिता के पास 20 बीघा बारानी और बंजर जमीन थी। तीनों भाइयों में 5-5 बीघा जमीन का बंटवारा कर दिया गया, जबकि शेष हिस्सा पिता ने अपने पास रखा। जमीन पूरी तरह रेतीली थी और भूजल स्तर बेहद नीचे था, जहां खेती की कल्पना करना भी मुश्किल था। न तो वहां ट्यूबवेल था और न ही बिजली का कोई कनेक्शन। आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। पहले दो साल डीजल इंजन से सिंचाई की गई। वर्ष 2012 में सरकार की योजना के तहत 90 हजार रुपए में 3 HP का सोलर प्लांट लगाया गया। पति को होमगार्ड की नौकरी से 3 हजार मिलते थे संतोष देवी ने बताया – होमगार्ड की नौकरी से 3 हजार रुपए की सैलरी मिलती थी। इस सैलरी में घर चलाना और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा था। वर्ष 2008 में करौली में होमगार्ड की नौकरी के दौरान उनके एक वरिष्ठ अधिकारी पृथ्वीराज मीणा उन्हें अपने बगीचे में ले गए। वहां अनार के पेड़ लगे हुए थे। पृथ्वीराज मीणा ने उन्हें अनार की खेती के बारे में जानकारी दी। घर लौटकर बगीचे के बारे में बताने पर मैंने कहा- नौकरी छोड़ दीजिए, हम दोनों मिलकर जमीन पर मेहनत करेंगे और अनार का बगीचा लगाएंगे। यही फैसला उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट बना। भैंस बेचकर खरीदे अनार के पौधे संतोष देवी ने बताया – राष्ट्रीय बागवानी विकास योजना के तहत वर्ष 2008-09 में सीकर में अनार के बगीचे लगाने की योजना आई थी। योजना के तहत ‘सिंदूरी’ अनार किस्म के पौधों का वितरण किया जाना था। अनार की यह किस्म महाराष्ट्र में तैयार की गई थी। एक पौधा 25 रुपए का था। करीब 220 पौधे खरीदने के लिए विभाग को 5,500 रुपए जमा कराए गए। इसके बाद पौधे लगाने और ड्रिप सिंचाई के लिए 45 हजार रुपए की जरूरत थी। उस समय हमारे पास पैसे नहीं थे। हमारे पास सिर्फ एक भैंस थी। हमने 25 हजार रुपए में भैंस बेच दी और बाकी के 20 हजार रुपए रिश्तेदारों से उधार ले लिए। इसी तरह बागवानी खेती की शुरुआत हुई। एक पौधे में 50 किलो गोबर संतोष देवी ने बताया – प्रत्येक पौधे के लिए करीब 50 किलो गोबर की खाद उपयोग में ली जाती है। खाद को पौधे के चारों ओर 4 फीट के दायरे में मिट्टी में मिक्स किया जाता है। कभी-कभी पत्ते मुड़ने और नए फुटाव नहीं आने की समस्या आती है, लेकिन समय पर उपचार से पौधे स्वस्थ रहते हैं। फंगस से बचाव के लिए नीला थोथा और चूना मिलाकर घोल बनाया जाता है, जिसका पौधों पर स्प्रे किया जाता है। प्रत्येक पौधे को 7 दिन में एक बार करीब 40 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। बगीचा लगाने पर किसानों को सरकार से छूट संतोष देवी रोजाना करीब 14 घंटे मेहनत करती हैं। इलाके के किसान उन्हें रोल मॉडल मानते हैं। वह पिछले 15 वर्षों से बागवानी खेती कर रही हैं। नर्सरी और फलों से करीब 40 लाख रुपए की कमाई हो रही है। संतोष देवी ने बताया – ऑर्गेनिक तरीके से पौधे तैयार करने के कारण उनकी नर्सरी भारत सरकार से रजिस्टर्ड है। बगीचा लगाने वाले किसान को एक हेक्टेयर बागवानी पर 66 हजार रुपए तक की सब्सिडी मिलती है। शेखावाटी कृषि फार्म बना पहचान आज बेरी गांव में 5 बीघा जमीन पर फैला शेखावाटी कृषि फार्म और उद्यान नर्सरी इलाके की पहचान बन चुका है। यहां नर्सरी में ऑर्गेनिक तरीके से फलदार पौधे तैयार किए जा रहे हैं। संतोष देवी और रामकरण न सिर्फ खुद खेती कर रहे हैं, बल्कि आसपास के किसानों को भी कम जमीन में अधिक मुनाफा कमाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। नवाचार खेती के लिए उन्हें कई सम्मान और पुरस्कार भी मिल चुके हैं। अब अगली पीढ़ी संभाल रही जिम्मेदारी संतोष देवी के बेटे राहुल भी खेत में ही प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित कर गांव के लोगों को रोजगार देने की तैयारी कर रहे हैं। राहुल ने वर्ष 2017 में स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर से बीएससी एग्रीकल्चर किया। इसके बाद दो वर्षों तक उन्होंने एग्रीकल्चर फील्ड ऑफिसर (AFO) की तैयारी की, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर वर्ष 2019 से खेती को ही अपना भविष्य बनाया। — खेती-किसानी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… गुरु ने कहा- मधुमक्खी पालन करो, अब लाखों की कमाई:22 साल के किसान ने हर दिन फूल-नेचर का व्यवहार स्टडी किया, फिर बिजनेस की शुरुआत चित्तौड़गढ़ का एक युवा बीते 5 साल से मधुमक्खी पालन और शहद की बिक्री से हर साल लाखों की कमाई कर रहा है। पूरी खबर पढ़िए
