भीलवाड़ा में शुक्रवार को यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा को जनता का विरोध झेलना पड़ा। मंत्री खर्रा शहरी सेवा कैंप के फॉलोअप शिविर का निरीक्षण करने पहुंचे थे। लोगों ने मंत्री खर्रा को बताया- तीन महीने से यूआईटी सेक्रेट्री नहीं है, हमारे काम नहीं हो रहे है। इस पर मंत्री ने जवाब दिया कि ‘अरे भाया थांका राज में 12-12 महीना कोनी लागता’। मंत्री के जवाब से नाराज लोगों ने मंत्री खर्रा को पांच दिन में समस्याओं का समाधान नहीं होने पर जयपुर में उनके आवास के बाहर धरना देने की चेतावनी दे दी। वहीं मीडिया से बातचीत के दौरान यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा- राज्य सरकार निकाय चुनावों को निष्पक्ष और समय से कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। राज्य सरकार निकाय चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निकाय चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और राज्य सरकार ने राजस्थान उच्च न्यायालय में अपने-अपने हलफनामे प्रस्तुत कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि सीमा वृद्धि, पुनर्गठन और वार्डों के नए सिरे से परिसीमन का जो भी कार्य सरकार के स्तर पर किया जाना था, उसे वर्ष 2026 की शुरुआत तक पूरा कर लिया गया था। वार्डों के पुनर्गठन से जुड़े एक मामले में उच्च न्यायालय का फैसला भी राज्य सरकार के पक्ष में आया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और ‘ट्रिपल टेस्ट’ की अनिवार्यता मंत्री ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के 2022 के ऐतिहासिक निर्णय की अनुपालना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को ‘ट्रिपल टेस्ट’ के आधार पर वार्ड-वार,निकायवार, पंचायतवार, पंचायत समितिवार, जिला परिषद-वार ओबीसी आबादी का सटीक आंकड़ा जुटाकर सरकार को सौंपना था। ताकि उनका परीक्षण करके राज्य सरकार पिछड़े वर्ग को राजनैतिक आरक्षण देने के सम्बन्ध में अधिसूचना जरी कर सके। चुनाव करना राज्य निर्वाचन आयोग का अधिकार हालांकि चुनाव की निश्चित तारीखों के सवाल पर मंत्री खर्रा ने कहा कि चुनाव की तारीखें घोषित करना और चुनाव संपन्न कराना राज्य निर्वाचन आयोग का अधिकार क्षेत्र है। राज्य सरकार केवल आवश्यक डेटा और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए उत्तरदायी है, और जब भी निर्वाचन आयोग जिस भी सहयोग की मांग करेगा, सरकार उसे तुरंत पूरा करने के लिए संकल्पबद्ध है। अगस्त में आकड़े मिलने की उम्मीद झाबर सिंह खर्रा ने बताया कि पिछड़ा वर्ग आयोग ने माननीय उच्च न्यायालय को अवगत कराया है कि वह अगस्त माह में ओबीसी आबादी से जुड़े प्रमाणित आंकड़े राज्य सरकार को सौंप देगा। जैसे ही आयोग से सटीक आंकड़े प्राप्त होंगे, राज्य सरकार एक सप्ताह के भीतर ओबीसी, एससी, एसटी और महिला आरक्षण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करके अंतिम रिपोर्ट राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप देगी। यूआईटी के बाहर इकट्ठे होकर नारेबाजी की मंत्री के यूआईटी पहुंचने पर बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्त्ता और शहरवासी इकट्ठे हुए और जमकर नारेबाजी करने लगे। लोगों ने आरोप लगाया कि पिछले 3 महीने से यूआईटी बिना सेक्रेटरी के चल रही है। पीड़ित बोला- नीलामी में प्लॉट खरीदा, कब्जा अभी तक नहीं मिला पीड़ित अशोक जैन ने बताया- किसी अधिकारी को अतिरिक्त कार्यभार नहीं दिया गया है। इसके चलते आम लोगों के काम प्रभावित हो रहे हैं। प्रशासन ने शहरी सेवा शिविर का मजाक बना रखा है। लोगों ने आरोप लगाया कि आमजन को पट्टे नहीं मिल रहे हैं, स्व मोटो ले आउट तैयार नहीं हो रहे हैं। लोगों को अपने काम के लिए बार-बार यूआईटी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। पीड़ित अशोक जैन ने बताया कि उसने 96 लाख में यूआईडी की नीलामी में एक प्लॉट खरीदा था, लेकिन अब तक उसे इस पर कब्जा नहीं मिल पाया है। 9 महीने पहले यूआईटी ने 3081 प्लॉट के लिए लॉटरी निकाली थी। जिसमें काफी गड़बड़ियां हुई है। जिन लोगों को इस लॉटरी में आवंटन हुए उन्हें भी हाईकोर्ट के रोक की वजह से पट्टा और कब्जा नहीं मिला। जिनको प्लॉट आवंटित नहीं हुए उनमें से कई लोगों को अब तक उन्हें रिफंड राशि भी नहीं मिल पाई है हालांकि मंत्री ने लोगों की बातों को दरकिनार करके चले गए। सेक्रेटरी लगाना सीएम का विषय मीडिया से बातचीत के दौरान खर्रा ने कहा कि यूआईडी में सेक्रेटरी लगाना सीएम का विषय है। हम उनसे आग्रह करेंगे की जल्दी सेक्रेटरी लगाया जाए। यूआईटी लॉटरी में विवादों में आए न्यास के अधिशासी अभियंता रविश श्रीवास्तव को फिर से यूआईडी में लगाए जाने के विषय पर भी मंत्री खर्रा किनारा कर गए और दिखवाने की बात कही।
