अलवर शहर के निकट बाला किला से नीचे अंधेरी के पास खंडहर भवन की चोटी पर बाघिन ST-2302 करीब 5 मिनट तक बैठी दिखी। शनिवार शाम को सफारी पर आए टूरिस्ट ने कैमरे में फोटो कैद किए। यह नजारा बेहद रोमांचकारी रहा। माने जंगल की रखवाली का जिम्मा लिए टाइग्रेस दीवार पर कभी बैठती है तो कभी खड़ी हो जाती है। टाइग्रेस के साथ 2 शावक भी हैं। लेकिन वो दीवार के ऊपर नहीं आए। सरिस्का का ये बफर जोन का जंगल है। जो अलवर शहर से सटा हुआ है। यहां पहाड़ की चोटी पर बाला किला है। नीचे सघन जंगल है। दोनों तरफ की पहाड़ियों की बीच में करणी माता का मंदिर है। बगल में अंधेरी क्षेत्र है। उसके पास ही वाटर हॉल है। इस वाटर हॉल के पास खंडहर भवन है। इसी भवन की सबसे ऊंची दीवार पर बाघिन एसटी 2302 सफारी पर आए टूरिस्ट को नजर आई। कुछ देर तक टाइग्रेस खड़ी रही और जंगल को देखती रही। फिर कुछ सैकंड के लिए बैठ गई। तभी अचानक जंगल में हलचल हुई तो बाघिन अचानक खड़ी हो गई। तब ऐसा लगा मानो टाइग्रेस किसी शिकार के लिए भवन के ऊपर तक आ गई। लेकिन कुछ देर बाद बाघिन नीचे चली गई। यह पूरा नजारा टूरिस्ट ने कैद कर लिया। असल में सरिस्का के बफर जोन के जंगल में टाइग्रेस एसटी 19 अपने चार शावकों के साथ अनेकों बार नजर आ चुकी है। अब बफर जोन में टाइगर की संख्या अच्छी खासी है। जिसके कारण आए दिन टाइगर नजर आ जाते है। अब यहां भी टूरिस्ट की संख्या बढ़ने लगी है। इस बाला किला के आसपास के जंगल के रेंजर शंकर सिंह ने बताया कि शनिवार की शाम को बाघिन एसटी 2302 अंधेरी के पास दिखी थी। यह उसी समय का फोटाे है। किसी टूरिस्ट ने लिया होगा।
