अधिकांश परिवारों में यह आम धारणा है कि बैंक खाता, इंश्योरेंस पॉलिसी या म्यूचुअल फंड में नॉमिनी दर्ज कर देने से विरासत का मामला अपने आप सुलझ जाता है। लोगों को लगता है कि नॉमिनी बनने वाला व्यक्ति ही मौत के बाद उस संपत्ति का मालिक बन जाता है। लेकिन कानूनी हकीकत इससे अलग है और यही गलतफहमी कई बार परिवारों के बीच लंबे विवाद की वजह बन जाती है। असल में नॉमिनी और कानूनी वारिस के अधिकार अलग होते हैं और कानून में अंतिम हक हमेशा वारिसों का ही माना गया है।
