भास्कर न्यूज | जालंधर रसीदी टिकट की लगातार कमी ने आम लोगों से लेकर वकीलों और राजस्व मामलों से जुड़े पक्षकारों की परेशानी बढ़ा दी है। जब भी किसी तरह का पैसों का लेनदेन होता है, रसीदी टिकट एविडेंस का एक अहम प्रूफ मानी जाती है। राजस्व अदालतों में कोर्ट फीस के रूप में इस्तेमाल होती है और सरकार के लिए एक अहम राजस्व स्रोत भी है, लेकिन मौजूदा हालात में रसीदी टिकट आसानी से उपलब्ध न होने के कारण कई जरूरी काम अटक रहे हैं। तहसीलदार, बीडीपीओ, एसडीएम, एडीसी, डीसी की कोर्ट में रोजाना बड़ी संख्या में इस तरह के मामले आते हैं। इनमें आवेदन, अपील, हलफनामे और विभिन्न प्रकार के लेनदेन में रसीदी टिकट का इस्तेमाल जरूरी होता है। जिला प्रशासकीय परिसर में छोटे-छोटे मामलों के लिए भी रसीदी टिकट जरूरी होती है। लेकिन स्टांप वेंडरों के पास या तो टिकट उपलब्ध नहीं है या फिर सीमित मात्रा में मिल रही है। कई बार मजबूरी में लोगों को अधिक दाम देकर टिकट खरीदनी पड़ती है, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। वहीं लोगों का कहना है कि जिस तरह सरकार ने ई-स्टांप और ई-कोर्ट फीस जैसी डिजिटल सुविधाएं शुरू की हैं, उसी तर्ज पर रसीदी टिकट का भी तकनीकी विकल्प तैयार किया जाए। अगर ई-रसीदी टिकट की व्यवस्था लागू होती है, तो न सिर्फ आम लोगों को राहत मिलेगी बल्कि सरकारी राजस्व में भी पारदर्शिता बढ़ेगी। दूसरी ओर जब इस समस्या को लेकर जिला खजाना अधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने पूरे मसले के बारे में जानकारी दी। जिला खजाना अधिकारी अमरनाथ ने जानकारी देते हुए बताया कि समस्या को लेकर हमने नोडल अफसर के पास डिमांड भेजी थी। वहां पर नासिक से रसीदी टिकट आती है और वहां से फिर आगे डिलिवर होती है। लेकिन पिछले कई महीनों से वहां पर भी स्टॉक नहीं है। जिले में नकोदर और शाहकोट के पास स्टॉक है। लोगों को वहां से खरीदने के िलए कहा जा रहा है। जल्द ही समस्या का समाधान कर लिया जाएगा। फिलहाल कुछ समय के लिए ही यह समस्या पैदा हुई है। अपने स्तर पर अधिकारी इसका समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं।
