फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट की दूसरी जमानत अर्जी भी खारिज हो गई है। दंपती इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के संस्थापक डॉ. अजय मुर्डिया से 30 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में 16 दिसंबर से जेल में बंद है। एसीजेएम-4 कोर्ट ने दो दिन चली लंबी बहस के बाद शुक्रवार को दंपती की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने अभियोजन व बचाव पक्ष की तमाम दलीलें सुनने के बाद माना कि जमानत मिलने की स्थिति में दोनों आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। इससे पूर्व बीमारी का हवाला देते हुए दायर की गई अंतरिम जमानत याचिका भी कोर्ट ने नामंजूर कर दी थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि भट्ट दंपती को सेंट्रल जेल में आम कैदियों की तरह ही रखा जाए। दोनों को फर्श पर ही सोना होगा। अन्य कैदियों के साथ लाइन में लगकर ही खाना खाना पड़ेगा। सर्दी से बचाव के लिए उन्हें तीन कंबल और एक दरी दी गई है। आरोपी भट्ट दंपती की ओर से अब जिला एवं सत्र न्यायालय में जमानत की अर्जी लगाई गई है। दूसरी ओर, इस पूरी धोखाधड़ी के सूत्रधार आरोपी सहेली नगर निवासी दिनेश कटारिया ने भी अब गिरफ्तारी से बचने के लिए सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी लगाई है। इस मामले की सुनवाई शनिवार को एडीजे-3 कोर्ट में होगी। कटारिया ने ही डॉ. मुर्डिया को आरोपी विक्रम भट्ट से मिलवाकर करार कराए थे। जोधपुर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, निर्णय आना बाकी पुलिस ने 7 दिन की रिमांड अवधि खत्म होने के बाद 16 दिसंबर को आरोपी भट्ट दंपती को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेजने के आदेश दिए गए। पुलिस की ओर से कोर्ट को बताया गया कि मामले की प्रारंभिक जांच पूरी हो चुकी है। इसलिए पुलिस हिरासत आवश्यक नहीं है। इस हाईप्रोफाइल मामले में जोधपुर हाईकोर्ट में भी मामला विचाराधीन है। भट्ट दंपती से पहले उनके को-प्रोड्यूसर महबूब अंसारी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जो अभी-भी जेल में हैं।