कोटपूतली क्षेत्र इन दिनों शीतलहर और पाले की चपेट में है। शुक्रवार रात की तेज सर्दी के बाद शनिवार सुबह खेतों में सब्जियों और अन्य फसलों पर ओस की सफेद चादर जम गई। लगातार पड़ रही इस शीत लहर और पाले से किसानों को रबी की फसलें खराब होने का डर सता रहा है। कृषि विभाग ने किसानों के लिए बचाव के उपाय जारी किए हैं। शीत लहर और पाले के बढ़ते खतरे को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। कोटपूतली-बहरोड के कृषि उप निदेशक डॉ. रामजीलाल यादव ने बताया कि समय पर अपनाए गए उपाय फसलों को पाले से होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। उन्होंने पाले से बचाव को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। फसलों को ढकने गंधक छिड़काव की सलाह सीमित क्षेत्र वाली फसलों, पौधशालाओं, उद्यानों और नगदी सब्जियों में पाले से बचाव के लिए भूमि का तापमान बनाए रखना महत्वपूर्ण है। इसके लिए फसलों को टाट, पट्टी या भूसी से ढकना लाभकारी होता है। साथ ही, हवा की दिशा को देखते हुए उत्तरी-पश्चिमी दिशा में अवरोध करने से भी पाले का असर कम किया जा सकता है। पाले की संभावना होने पर किसानों को व्यावसायिक ग्रेड गंधक के तेजाब का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। एक लीटर गंधक को एक हजार लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। इसका प्रभाव लगभग दो सप्ताह तक रहता है। यदि पाले की आशंका बनी रहे, तो 15 दिन के अंतराल पर दोबारा छिड़काव किया जा सकता है।
