16 जुलाई, 1979, रात 12 बजे का वक्त था। हनुमानगढ़ जिले की नोहर तहसील में स्थित में बिरकाली गांव में सन्नाटा छाया हुआ था। हवा में गर्मी थी। गांव में एक साधारण मिट्टी का घर। एक मेहनतकश किसान, उसकी पत्नी, एक बेटा और पांच छोटी-छोटी बेटियां सो रही थीं। सबसे छोटी बेटी 5-6 साल की थी। खेतों से लौटकर पति-पत्नी दोनों थके हुए थे, इसलिए गहरी नींद में थे। गर्मी के चलते घर के दरवाजे खुले थे। दरवाजे खोलकर सोने की वजह थी कि गांव में चोरी का डर नहीं था। अचानक कुछ साये चुपचाप घर में घुसे। हाथों में कुल्हाड़ियां, तलवारें और अन्य धारदार हथियार लिए। पहला कमरा। सोते हुए किसान पर कुल्हाड़ी के तेज झटके के साथ पहला वार और मौत। हड़बड़ाकर पास ही सो रही किसान की पत्नी जागी। इतने में ही एक और वार पत्नी पर हुआ और वो भी मौके पर ही ढेर हो गई। अचानक मचे इस कत्लेआम से उस घर का आंगन ही नहीं दीवारों तक पर खून ही खून हो गया। हत्यारे इतने से भी नहीं रुके। इसके बाद एक-एक कर उन्होंने पहले किसान के बेटे और इसके बाद 4 बेटियों को नींद में ही कुल्हाड़ी और तलवार से वार कर मौत के घाट उतार दिया। चीख-पुकार सुन सबसे छोटी और पांचवी बेटी ने आंखें खोलीं। डर से रोने लगीं। उसने भागने की कोशिश की, लेकिन वो भी हत्यारों से बच नहीं पाई। घर का फर्श और दीवारें खून से लाल हो गईं। पड़ोसी भी घर में घुसने की हिम्मत नहीं जुटा पाए थे
ये घर बिरकाली गांव में रहने वाले किसान भगतु राम का था। वो पत्नी, बेटे और 5 बच्चियों के साथ सो रहा था, जब हत्यारों ने हमला किया। जब उसके घर में ये कत्लेआम चल रहा था तभी पड़ोस के घर में सो रहे ख्याली राम व राम किशन को हल्की आवाजें सुनाई दी थी। वे उठे और भगतु राम के घर की तरफ आए। अंधेरे में झांका तो घर के अंदर कुछ साये हिल रहे थे। जब उन्होंने गौर से देखा तो जो मंजर उन्हें नजर आया। डर से उनके पैर वहीं जम गए। वे चुपचाप वापस लौट गए थे। उनके अलावा एक और पड़ोसी जयसिंह भी अपने घर की छत पर सो रहा था। भगतु राम के घर में चीख-पुकार के शोर से जागा। नीचे देखा तो भगतु राम के घर में मौत का खेल चल रहा था। वो भी डर के मारे चुप रहा। उसकी भी छत से नीचे उतरने की हिम्मत नहीं हो पाई। इस बीच हत्यारों ने अपना काम बड़े इत्मीनान और बेखौफ अंदाज में पूरा किया। फिर चुपचाप गांव से बाहर निकल गए। इधर खौफ इस कदर हावी था कि सूरज उगने के बाद भी जयसिंह, ख्यालीराम व राम किशन तीनों में किसी की भगतु राम के घर जाने और उसके हाल जानने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। घर में शव बिखरे थे
इधर, दिन निकलने के बाद एक शख्स भगतु राम के घर के पास से गुजरा। दरवाजा खुला देखा तो उसने अंदर झांका। उसने जो देखा उसके बाद तो उसकी आंखे फटी की फटी रह गई थी। घर में शव बिखरे पड़े थे। खून से लाल फर्श देख वो चीखा और दौड़कर सरपंच साही राम के पास गया और उन्हें पूरा मंजर बताया। सरपंच साही राम तुरंत ही मौके पर आए। भगतु राम, उसकी पत्नी, बेटे और 5 बच्चियों के क्षत-विक्षत शव पड़े थे। घटना का पता चला तो पूरे गांव में हड़कंप मच गया था। सरपंच साही राम ने तत्काल पुलिस को सूचना भेजी। पुलिस मौके पर पहुंची। शव कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए हॉस्पिटल भेजे गए। इसक बाद पुलिस ने इन्वेस्टिगेशन स्टार्ट कर दी। 20 साल पहले हरियाणा से राजस्थान आए थे
पड़ताल में सामने आया कि भगतु राम मूल रूप से हरियाणा के सिरसा जिले के सिगोरानी गांव का निवासी था। इस घटना से लगभग 20 साल पहले, वो अपने बड़े भाई श्योलाल के साथ बिरकाली गांव में रहने आया था। उन्होंने यहां खेती के लिए 50 बीघा कृषि भूमि खरीदी। दोनों भाई दो-तीन साल तक बिरकाली गांव में साथ-साथ रहे। उसके बाद श्योलाल वापस हरियाणा में अपने पैतृक गांव सिगोरानी लौट गया था। हाल फिलहाल में भगतु राम और उसका परिवार ही बिरकाली गांव में रहता था। उसकी किसी से गांव में कोई रंजिश या दुश्मनी भी नहीं थी। वो सिर्फ अपने काम से काम रखने वाला एक मेहनती किसान था। एक ही परिवार के 8 सदस्यों की निर्मम हत्या की गई थी। पुलिस पर भी बड़ा दबाव था। इन्वेस्टिगेशन में पुलिस के हाथ कोई भी ऐसा क्लू नहीं लग पा रहा था जो हत्याकांड की वजह और हत्यारों को पकड़ने में मददगार बन सकता हो। पुलिस ने पहले लूट या चोरी के एंगल से भी पड़ताल करने की कोशिश की, लेकिन घर में से कुछ भी चोरी नहीं हुआ था, यहां तक की किसी भी सामान को हाथ तक नहीं लगाया गया था। ऐसे में पुलिस को इस हत्याकांड का सच सामने लाने के लिए इन सवालों के जवाब तलाशना बाकी था… कल राजस्थान क्राइम फाइल्स पार्ट-2 में पढ़िए इन सभी सवालों के जवाब
