साहित्य रसिक समिति सारस बारां द्वारा सारस कार्यालय धाकड़ पाड़ा बारां पर सारस की इक्कीसवीं कृति दुनिया मायाजाल का विमोचन समारोह हुआ। समारोह की अध्यक्षता शिक्षाविद् गोविंद गोस्वामी ने की। मुख्य अतिथि साहित्य मनीषी टीकमचंद डोडरिया छबड़ा थे। विशिष्ट अतिथि कवि कमलेश चौधरी कोटा, बाबूलाल बंजारा एवं जगदीश जलजला थे। संचालन ओम साहू ने किया। नाथूलाल निर्भय ने काव्य वंदना प्रस्तुत की। पुरोधा कवि डाक्टर नलिन की रचनाओं का वाचन श्याम अंकुर ने किया। समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार टीकमचंद डोडरिया ने कहा कि कवि ब्रजेश की रचनाएं विविधता लिए हुए होती हैं। सरल भाषा शैली में गूढ़ से गूढ़ बात को कह जाना इनकी रचना धर्मिता की विशेषता है। प्रस्तुत कुंडलिया संग्रह दुनिया मायाजाल में भी यही विशेषता देखने को मिलती है। श्याम अंकुर ने बताया कि कवि ब्रजेश की यह सातवीं कृति है। इससे पूर्व कवि ब्रजेश के क्यों सखि साजन ( मुकरियां) सारा मूढ़ खराब हो गया (हजल) ढाई आखर प्रेम के (दोहा) जय हो इस जनतंत्र की (गजल ) कुछ तीर कुछ तुक्के (मुक्तक ) देश हमारा गुलदस्ता गीत संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। कवि कमलेश कमल ने कवि ब्रजेश एवं सुधारानी चतुर्वेदी का सम्मान किया। कवि बाबू बंजारा ने बताया कि दुनियां मायाजाल समर्थ ओर अनुपम कुंडलिया संग्रह कृति है। कवि जगदीश जलजला ने कहा कि कवि ब्रजेश का कुंडलिया संग्रह दुनिया मायाजाल समाज की कुरीतियों एवं विद्रूपताओं पर तीखा प्रहार करता है। देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत यह कुंडलिया संग्रह समाज को दिशाबोध देगा। कमलेश चौधरी कोटा ने कहा कि दुनियां मायाजाल सरल एवं सहज भाषा में लिखी गई है। शिक्षाविद् गोविंद गोस्वामी ने कहा कि यह संग्रह बारां जिले के साहित्य के लिए मील का पत्थर बनेगा। शिवनारायण थूंनगर, शकुंतला कुंतल, जितेंद्र सोनी, जगदीश सोनी, बृजभूषण चतुर्वेदी ब्रजेश, हरि अग्रवाल, ओम साहू, सोनू सुरीला, पुरुषोत्तम शर्मा, बच्छराज राजस्थानी, रामगोपाल गौतम, बाबू बंजारा, कमलेश कमल, मयंक सोलंकी, श्याम अंकुर, भैरूलाल भास्कर, श्री राम शर्मा, टीकमचंद डोडरिया, गोविंद गोस्वामी, नाथूलाल निर्भय ने काव्यपाठ किया। सारस के उपाध्यक्ष रामगोपाल गौतम ने धन्यवाद ​दिया।