तरनतारन के डिप्टी कमिश्नर राहुल और मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. तेजबीर सिंह भंगू के दिशा-निर्देशों के तहत उप-मंडल पट्टी के गांव शहीद में एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण शिविर (Farmer Training Camp) का आयोजन किया गया। कृषि विभाग द्वारा यह विशेष कैंप फसल अवशेष प्रबंधन (Crop Residue Management) को बढ़ावा देने और किसानों को खेतों में पराली जलाने से रोकने के उद्देश्य से लगाया गया। शिविर के दौरान ब्लॉक कृषि अधिकारी डॉ. भूपिंदर सिंह ने किसानों से पराली न जलाने की भावुक अपील की। उन्होंने पराली प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों के लाभ बताते हुए कहा कि फसल अवशेषों को खेत में ही मिलाने से मिट्टी में लंबे समय तक नमी बरकरार रहती है, खरपतवार (Weeds) का प्रकोप कम होता है और जमीन की प्राकृतिक उर्वरता (Soil Fertility) में भारी सुधार होता है। पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है धुआं डॉ. भूपिंदर सिंह ने किसानों को सचेत करते हुए कहा कि पराली में आग लगाने से उठने वाला जहरीला धुआं इंसानों, मवेशियों, पक्षियों और पूरे पर्यावरण के लिए बेहद घातक है। इससे सांस और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियां फैलती हैं और पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ता है। बीज उपचार और सरकारी सब्सिडी की दी गई जानकारी कार्यक्रम के दौरान डॉ. परमिंदर कौर ने किसानों को बीज उपचार (Seed Treatment) और फसल सुरक्षा के आधुनिक उपायों के बारे में विस्तार से बताया। वहीं, डॉ. हरमदीप कौर ने मिट्टी की जांच प्रक्रिया और पराली प्रबंधन से जुड़ी कृषि मशीनरी पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी की विस्तृत जानकारी साझा की। शिविर के अंत में उपस्थित किसानों को सब्जियों की उन्नत बीज किटें और खेती से संबंधित विभागीय साहित्य वितरित किया गया।
