पंजाब के बरनाला जिले में भाकियू एकता डाकौंदा के आह्वान पर किसानों ने गांवों में पोस्टर लगाए हैं। इन पोस्टरों में पराली जलाने के लिए किसानों को नहीं, बल्कि सरकार को जिम्मेदार ठहराया गया है। संगठन ने पराली जलाने की नीति को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। संगठन का कहना है कि पराली जलाना किसानों की मजबूरी है, गलती नहीं। इसलिए उन्हें दोषी ठहराना बंद किया जाए। भाकियू एकता डाकौंदा के राज्य प्रधान मनजीत सिंह धनेर ने कहा कि दिल्ली और पंजाब में प्रदूषण के मुख्य कारण थर्मल प्लांट, वाहन और फैक्ट्रियां हैं, लेकिन सरकारें किसानों पर दोष मढ़ रही हैं। सरकार ने नहीं लागू किया एनजीटी की सिफारिशें उन्होंने कहा कि बिना मशीन और आर्थिक मदद के किसानों से पराली न जलाने की उम्मीद करना अनुचित है। संगठन के महासचिव हरनेक सिंह महिमा ने बताया कि एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट ने छोटे किसानों को पराली प्रबंधन के लिए हैप्पी सीडर मशीनें या नकद सहायता देने की सिफारिश की थी। सरकार ने अब तक इन सिफारिशों को लागू नहीं किया है। किसान आंदोलन के लिए तैयार उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बिना सहायता के किसानों पर कार्रवाई जारी रही, तो संगठन आंदोलन करेगा। गुरदीप सिंह रामपुरा ने जानकारी दी कि संगठन ने गांवों में फ्लेक्स बोर्ड लगाकर सरकार को चेताया है। इन बोर्डों के माध्यम से कहा गया है कि बिना मदद के किसानों पर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों का विरोध किया जाएगा। धान की नमी 22 फीसदी की जाए नेताओं ने सरकार से यह भी मांग की है कि किसानों को दंडित करने से पहले धान में नमी की सीमा 22 प्रतिशत की जाए। साथ ही, डीएपी खाद की आपूर्ति तुरंत शुरू की जाए ताकि किसान समय पर बुवाई कर सकें। भाकियू डाकौंदा के नेताओं ने जोर देकर कहा कि किसान पंजाब की रीढ़ हैं। यदि सरकार इस रीढ़ को तोड़ने का प्रयास करेगी, तो विरोध की लहर को रोकना मुश्किल हो जाएगा।