राजस्थान के 17 जिलों में किसानों को खजूर के खराब पौधे थमा दिए गए। 10 महीने बाद भी जब खजूर नहीं पनपी तो जांच की गई। इसमें पता चला कि पौधे नर है, जिसके कारण उनमें फूल नहीं आएंगे। इसके कारण अच्छी फसल की आस में बैठे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। किसानों की शिकायत पर विभाग ने पौधों की सप्लाई करने वाली फर्म के अधिकारियों पर श्रीगंगानगर में 5 अक्टूबर 2025 को मामला दर्ज करवाया। इसके बाद श्रीगंगानगर के किसानों को 1.10 करोड़ मुआवजा जारी किया है। जबकि बाड़मेर, जैसलमेर, अजमेर, बीकानेर, हनुमानगढ़, झुंझुनू और पाली के किसानों को भी एक करोड़ का मुआवजा खातों में ट्रांसफर किया जाएगा। साथ ही खराब पौधों को रिप्लेस कर सही पौधे भी दिए जाएंगे। सरकार ने प्रति पौधा 3 हजार रुपए सप्लायर को दिए
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार ने खजूर की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए प्रति पौधा 75% अनुदान तय किया था। सरकार की ओर से सप्लायर फर्म को प्रति पौधा 3 हजार रुपए देने थे। हॉर्टिकल्चर विभाग के टेंडर में मेडजूल, खुनैजी, बरही और अल-इन-सिटी जैसी उन्नत किस्मों के पौधे सप्लाई करने का प्रावधान था। 17 जिलों में डेढ़ लाख से ज्यादा पौधे सप्लाई किए
नई दिल्ली के कनॉट प्लेस और जयपुर की सी-स्कीम स्थित मैसर्स भारतीय राष्ट्रीय निर्माण एवं विकास सहकारी संघ(NFCD) को 25 मई 2022 को जयपुर में अनुबंध मिला। इसमें प्रति पौधा 4350 से 5000 रुपए का रेट फिक्स हुआ। प्रदेश के 17 जिलों में कुल डेढ़ लाख से ज्यादा पौधे सप्लाई किए गए, जिनमें औसतन 4700 रुपए प्रति पौधा भुगतान हुआ। कुल घोटाला करीब 35.25 करोड़ का था। ऐसे में राजस्थान के आठ जिलों के अलावा दूसरे 9 जिलों में भी जांच की जा रही है। श्रीगंगानगर में सबसे पहले पकड़े गए थे नकली पौधे
2024 में जब लगाए गए पौधों में फूल नहीं आए, तो किसानों ने शिकायत की कि पौधे उन्नत नस्ल के नहीं हैं। ज्यादातर नर पौधे मादा बताकर थोपे गए या खराब क्वालिटी के थे। श्रीगंगानगर में 6500 से अधिक पौधे सप्लाई हुए। इनमें से 3811 पौधे खराब निकले। जिले में 344 पौधों की पहली खेप 21 सितंबर 2022 को आई थी और कुल 18 किसानों ने 47 हेक्टेयर (लगभग 200 बीघा) में इन्हें लगाया था। लेकिन पौधे फसल तो बन गए, लेकिन फल नहीं आए। अनुबंध के मुताबिक खराब पौधे मिलने पर NFCD को प्रति पौधा प्रति वर्ष 800 रुपए का हर्जाना देना था और पौधे बदलकर देने थे। लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद न हर्जाना दिया गया, न पौधे बदले गए। किसान बोले- एक साल बाद पता चला कि पौधे खराब है
सूरतगढ़ के किसान शीशपाल का कहना है- हमने 2023 में हॉर्टिकल्चर विभाग से प्रेरित होकर खजूर के पौधे लगाए थे। लेकिन विभाग ने नकली पौधे दे दिए थे। इसके बाद से हम लगातार इसकी शिकायतें कर रहे थे, जिससे नुकसान की भरपाई हो और मुआवजा मिले। अब हमें मुआवजा देने के आदेश हुए हैं और पौधे भी रिप्लेस होंगे। किसान छगन लाल का कहना है- मैंने हॉर्टिकल्चर विभाग श्रीगंगानगर के माध्यम से 899 खजूर के पौधे लिए थे। लेकिन एनएफसीडी ने फ्रॉड करते हुए नकली खजूर के पौधे दे दिए। इसका हमें एक साल बाद पता चला। हमने इसकी शिकायतें की और मुआवजा मांगा। सुनवाई करते हुए हॉर्टिकल्चर विभाग ने कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया। अब जाकर मुआवजे के आदेश हुए हैं। FIR के बाद अब मिलेगा मुआवजा
उप निदेशक (उद्यान) प्रीति बाला गर्ग ने कोतवाली थाने में 5 अक्टूबर 2025 को मामला दर्ज कराया था। FIR में NFCD के दिल्ली और जयपुर के अधिकारी सुभाष चौधरी, बनवारीलाल सेपट, अशोक शर्मा, ओमप्रकाश शर्मा, चेयरमैन श्रीराम इकवाल सिंह और रनजीत सिंह के खिलाफ कार्रवाई हुई। अब हॉर्टिकल्चर विभाग ने फैसला लिया है कि प्रभावित किसानों को मुआवजा और रिप्लेसमेंट पौधे दिए जाएंगे। श्रीगंगानगर जिले के लिए 1 करोड़ 10 लाख रुपए आवंटित किए गए हैं। यहां 3 हजार पौधे आवंटित थे, जिनमें से 1700 पौधे रिप्लेस होंगे। मार्च महीने में मुआवजा किसानों के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।