नमस्कार कोटा में विधायक मैडम ने सफाई को लेकर मंडी सचिव को जमकर खरी-खरी सुनाई। सवाई माधोपुर में महोत्सव अमरूद का हुआ, लेकिन ‘मिठास’ की महफिल किरोड़ी बाबा ने अपने नाम कर ली। धौलपुर में प्रिंसिपल के तबादले के बाद छात्राओं ने हंगामा कर दिया। भीलवाड़ा में बजरी माफिया को पकड़ने के लिए पुलिस ने फिल्मी स्टाइल दिखा दी। राजस्थान की राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. ‘तो फिर कौन करेगा नाली की सफाई..?’ विधायक मैडम ने गुस्से में यक्ष प्रश्न दागा- तो फिर कौन करेगा नाली की सफाई? सचिव जी ने लगभग मिमियाते स्वर में कहा- हम ही करेंगे। मामला कोटा का है। मैडम लाडपुरा से विधायक हैं। भामाशाह मंडी का जायजा लेने निकलीं थीं। देखा कि कचरे के ढेर लगे हैं। नालियां गंदगी से अटी पड़ी हैं। मैडम का पारा सातवें आसमान पर। उनके आने की खबर हालांकि पहले ही पहुंच चुकी थी। इसलिए मंडी सचिव ने सड़कें साफ करा दी थी। लेकिन नालियां टाइम मांगती हैं। टाइम था नहीं। सचिव जी लपेटे में आ गए। मैडम ने जमकर लताड़ा। कहा- पूरी मंडी में कोई एक जगह दिखा दीजिए कि ये साफ है। सचिव महोदय बगलें झांकने लगे। मंडी 300 बीघा की है। यहां सफाई कर्मचारियों की संख्या करीब 30 है। व्यापारी जानते नहीं कि डस्टबिन क्या होता है। गंदगी होना स्वाभाविक है। मैडम जिस पार्टी से हैं, वह सत्ता में है। प्रशासन भी खुद का है जिम्मेदारी भी खुद की। भड़कने का लाभ यह हुआ कि खूब रीलें बन गईं जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हैं। 2. सवाई माधोपुर में जनता का प्यार सवाई माधोपुर तीन कारणों से प्रसिद्ध है-अमरूद, रणथंभौर और डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के लिए। किरोड़ी बाबा सवाई माधोपुर से ही विधायक हैं। शहर 263 साल का हो गया है। ऐसे में खूब उत्सव चला। चीफ गेस्ट कृषि मंत्री किरोड़ी लाल रहे। शोभायात्रा में रणथंभौर की झलक दिखी। लोक कलाकार वानर, भालू और टाइगर के भेष में तैयार होकर चले। किरोड़ी बाबा कलाकारों को निहारते हुए पैदल साथ चले। किरोड़ीलाल की उपस्थिति ने कलाकारों को भी उत्साह से भर दिया। इससे पहले अमरूद महोत्सव हुआ। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला भी पहुंचे। बाबा भीड़ देख गदगद। माइक पर बोले- इतनी तादाद में आकर आप लोगों ने मेरी साख रख ली। अब लोकसभा स्पीकर दिल्ली जाकर मोदी जी को बताएंगे कि कितनी भीड़ आई थी। इतनी भीड़ इसलिए आई है कि किसान मुझसे प्यार करते हैं और मैं आपसे प्यार करता हूं। फेस्टिवल में अमरूद की 30 वैरायटी दिखी, लेकिन बाबा की वैरायटी वन एंड ओनली। पद दंगल में उनकी इतनी पैठ कि उन पर लोकगीत बन गया- बाबो लायो नई स्कीम। गीत सुनकर किरोड़ी बाबा भी खूब थिरके। 3. एक और टीचर के लिए आंदोलन यह तो हद हो गई है। पहले भीलवाड़ा। फिर झुंझुनूं। और अब धौलपुर। छात्र-छात्राओं को क्या हो गया है? क्या उन्हें नहीं मालूम की सरकारी नौकरी में तबादला आम प्रक्रिया है, प्रोसेस। यह चलता रहता है। तबादले का नियम शास्त्रों से लिया गया है- जो आया है उसे एक दिन जाना ही है। गुलजार साहब ने भी लिखा है- आने वाला पल जाने वाला है। फिर भी बच्चे चाहते हैं कि उन्हें अमुक टीचर ही पढ़ाए। अमुक लेक्चरर ही उनके स्कूल में लगा रहे और अमुक प्रिंसिपल ही सारी व्यवस्थाएं संभाले। कुछ शिक्षक सरकारी नौकरी का मतलब ही नहीं समझते। सरकारी टीचर का मतलब देर से आना और जल्दी जाना। कभी-कभी न आकर भी उपस्थिति रजिस्टर में दस्तखत के रूप में मिल जाना। धूप में बैठकर पोषाहार में नॉनवेज पकवाना। किसी बहाने से पढ़ाई कार्य से बच निकलना और स्कूल टाइम में निजी कार्य करना। इस बने हुए नियम के बावजूद कुछ शिक्षक बच्चों को अपना परिवार मान लेते हैं। उन्हें अपने बच्चों की तरह प्यार करते हैं। माता-पिता की तरह उनके भविष्य की चिंता करते हैं। अच्छे दोस्त की तरह मुश्किल सवालों के हल समझाते हैं। ऐसे गुरुओं से कबीर दास जी का पाला भी पड़ा होगा। तभी उन्होंने लिखा- गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। धौलपुर के बाड़ा हैदर साहब के सरकारी स्कूल के छात्र-छात्राओं को शिक्षा विभाग के प्रशासनिक अधिकारी ने खूब समझाया कि प्रिंसिपल साहब अपनी जेब से स्कूल का भला नहीं कर रहे थे, सरकार पैसा देती है। पैसा तो सरकार हर टीचर और हर स्कूल को देती है। फिर कुछ ही टीचर्स को अपने स्कूल में बनाए रखने के लिए बच्चे क्यों आंदोलन पर उतर आते हैं। जवाब सीधा और सरल है- वे टीचर बनकर पढ़ाते नहीं, गुरु बनकर सिखाते हैं। 4. चलते-चलते.. भीलवाड़ा की पुलिस को लगता है कि सिर्फ वही बंबइया फिल्में देखती है और फिल्मी स्टाइल सिर्फ उसे आती है। लेकिन ऐसा नहीं है। फिल्में सभी देखते हैं और फिल्में सभी पर बराबर प्रभाव डालती हैं। भीलवाड़ा में पुलिस बजरी माफिया का सफाया करने की सौगंध खाकर कार्रवाई कर रही है। पुलिस के जवान जेब में रुमाल की जगह कफन रखकर चल रहे हैं ताकि जरूरत के वक्त तुरंत उसे सिर पर बांधा जा सके। संडे का दिन था। बजरी माफिया इत्मीनान से ट्रॉली में बजरी भरकर भीमगंज इलाके के तिलक नगर से गुजर रहा था। ट्रॉली में बजरी भरी देख वहां से बाइक पर निकल रहे पुलिस के दो जवानों ने ड्राइवर को रुकने का इशारा किया। बजरी माफिया ने ‘बुलाती है मगर जाने का नहीं’ उसूल के तहत ट्रैक्टर रोका नहीं, बल्कि स्पीड बढ़ा दी। पुलिसवालों ने इसे खाकी की तौहीन समझा और जेब से कफन निकालकर सिर पर बांध लिया। इसके बाद चलती बाइक से चलते ट्रैक्टर की ट्रॉली में चढ़ गया। उसका यह अंदाज फिल्मी था। ट्रैक्टर के ड्राइवर ने भी ‘डॉन’ कई बार देखी थी। उसने भी तय कर लिया था कि ‘मुझे पकड़ना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन कर दूंगा।’ जिस फिल्मी अंदाज का इस्तेमाल पुलिसवाले ने ट्रैक्टर में चढ़ने में किया, उसी अंदाज का प्रयोग करते हुए ड्राइवर चलते ट्रैक्टर से कूदकर भाग निकला। अब पुलिसवाला ‘बिना ड्राइवर वाली टेस्ला’ की जगह बिना ड्राइवर वाले ट्रैक्टर में सवार था। जान बचाने वह भी ट्रॉली से कूद पड़ा। हालांकि ट्रैक्टर ड्राइवर हाथ नहीं लगा। तलाश जारी है। (इनपुट सहयोग- मुकेश सोनी (कोटा), नरेंद्र भारद्वाज (सवाई माधोपुर), नीरज चौधरी (धौलपुर), मनीष जैन (भीलवाड़ा)।) वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल मुलाकात होगी…
