भास्कर ने रविवार को खुलासा किया कि कैसे विधायक निधि का 40% पैसा कमीशन में बंटता है। लेकिन यह कमीशनबाजी का खेल विधायकों तक ही सीमित नहीं है, इसके बाद अफसर भी 10% कमीशन लेते हैं। इसके बाद ही वर्क ऑर्डर-पेमेंट तक का काम होता है। रिपोर्टर जब खींवसर से भाजपा के विधायक रेवंतराम डांगा और हिंडौन से कांग्रेस की विधायक अनीता जाटव की अनुशंसा का लेटर लेकर अधिकारियों के पास गया तो उन्होंने अपने हिस्से की डील की। डांगा ने खींवसर व मूंडवा के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (सीबीईओ) को कार्यकारी एजेंसी बनाया। वहीं, अनीता जाटव ने करौली के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) को। प्रक्रिया के अनुसार विधायक की अनुशंसा की प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद बाकी का पूरा काम कार्यकारी एजेंसी ही करती है। करौली डीईओ को अनीता का लेटर दिखाया तो बोले- कर देंगे
रिपोर्टर ने हिंडौन विधायक अनीता जाटव का 80 लाख की अनुशंसा लेटर करौली के डीईओ (प्रारंभिक) पुष्पेंद्र शर्मा को दिखाया तो वे बोले- ‘क्या लिखना है, ये बता देना।’ उन्हें बताया कि वर्क ऑर्डर से लेकर बाकी काम में आपको ही मदद करनी है तो कहा- ‘कर देंगे!’ उनका फोन लगातार बज रहा था। अंत में 10 फीसदी कमीशन पर डील फाइनल हुई। डीईओ पुष्पेंद्र शर्मा बोले- ‘ठीक है!’ मूंडवा के सीबीईओ ने कमीशन के साथ सामान भी मांग लिया
खींवसर विधायक रेवंतराम डांगा की अनुशंसा का लेटर मूंडवा सीबीईओ कैलाशराम को दिखाया तो तुरंत पूछा- ‘इसमें मेरा क्या फायदा होगा?’ उनसे पूछा तो बोले- ‘मैं तो इसी साल सीबीईओ बना हूं, मुझे इस बारे में ज्यादा पता नहीं है। आप क्या देते हो?’ जब उन्हें 5% कमीशन के लिए बताया तो हिसाब लगाया कि कितना बनेगा। फिर बोले- ‘ठीक है। लेकिन मेरे लिए भी एक दरी फर्श ले आना। घर पर काम आ जाएगा।’ डीईओ और सीबीईओ से डील का पूरा वीडियो भास्कर के पास है 50% कमीशन बांटकर भी फर्म को 20% का मुनाफा, काम सिर्फ 30% में
चौकाने वाली बात है कि जनता का 70 फीसदी पैसा तो कमीशन और मुनाफे में जा रहा है। यानी काम में मात्र 30 फीसदी ही लग रहा है। विधायक डांगा व अनीता ने रिपोर्टर को दिए लेटर में 12×15 फीट के प्रति कारपेट की अनुशंसा 25 हजार की रेट पर की। लेकिन, जो सप्लाई होता है उसकी कीमत मात्र 5,700 रुपए यानी 30% ही है। साइज तो उतना ही है, लेकिन क्वालिटी घटिया होती है। इससे फर्म को प्रति कारपेट 50% (12,500 रुपए) कमीशन बांटने के बाद भी 20% (5 हजार रुपए) का मुनाफा हो जाता है। तीनों विधायकों ने 1.70 करोड़ की डील की। इसमें कारपेट 51 लाख के आते, कमीशन 85 लाख बंटता और फर्म को 34 लाख का मुनाफा होता।