राजस्थान के बेरोजगार युवाओं को कंबोडिया ले जाकर साइबर ठगी की ट्रेनिंग दी जा रही है। चीन के साइबर ठग उन युवाओं को फर्जी CID ऑफिसर, IPS ऑफिसर बनकर ठगी के तरीके सिखाते हैं। बिजनेसमैन और पैसे वालों को ठगने का टारगेट देते हैं। इतना ही नहीं, ठगी के लिए राजस्थान के ही बैंक खातों और SIM का इस्तेमाल हो रहा है। ये खुलासा हुआ है, लगातार 3 दिन 18, 19 और 20 जनवरी को साइबर ठगी की तीन बड़ी कार्रवाइयों में। इसमें बानसूर से 50 युवाओं को कंबोडिया भेजने वाले एक दलाल हत्थे चढ़ा। वहीं, जोधपुर से कंबोडिया के ठगों को राजस्थान के फर्जी एड्रेस पर एक्टिव मोबाइल सिम भेजने वाले का खुलासा हुआ। इसके बाद कोटा से वो सरगना पकड़ा जो ठगी का पैसा ठिकाने लगाने के लिए कंबोड़िया की गैंग को बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) उपलब्ध कराता था। भास्कर ने इन तीनों कार्रवाई में सामने आई पुलिस पड़ताल का एनालिसिस किया। सामने आया कि वर्तमान में राजस्थान की 5 हजार से अधिक सिम कंबोडिया में एक्टिव हैं। इन्हीं सिम से बैंक खातों को हैंडल कर हजारों करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया जा रहा है। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए पूरी पड़ताल…. 1. राजस्थान में बैठे दलाल युवाओं को भेजते हैं कंबोडिया कोटपूतली-बहरोड़ पुलिस ने 19 जनवरी को रामनगर (बानसूर) निवासी दलाल सुरेश सेन को गिरफ्तार किया था। सुरेश देशभर से युवाओं को साइबर फ्रॉड के लिए कंबोडिया भेजता था। सुरेश ने बानसूर से ही 50 युवाओं को कंबोडिया साइबर फ्रॉड सेंटर पर काम के लिए भेजा था। इन्हें 1 से 1.5 लाख रुपए महीने की सैलरी का लालच दिया गया था। उन्हें डेटा एंट्री कस्टमर सपोर्ट व डिजिटल मार्केटिंग जैसी नौकरी के नाम पर झांसे में लिया गया। लेकिन बाद में ठगी के काम में लगा लिया गया। यह होती है ट्रेनिंग सुरेश सेन ने पुलिस को बताया कि कंबोडिया के स्कैम सेंटर पर राजस्थान से युवकों को डिजिटल अरेस्ट की स्क्रिप्ट दी जाती है। फर्जी IPS, CBI इंस्पेक्टर और ED ऑफिसर बनकर कैसे बात करनी है, इसका तरीका सिखाया जाता है। बताते हैं कि कौनसा-अधिकारी किस लहजे में बात करता है, कैसे धमकाता है, ऑफिशियल लैंग्वेज क्या होती है, शिकार को भरोसे में कैसे लेना है, इन सबकी ट्रेनिंग भी देते हैं। डिजीटल अरेस्ट से भी कोई झांसे में नहीं आए तो शेयर मार्केट, क्रिप्टो करेंसी में निवेश के नाम पर ठगी करने का तरीका सिखाया जाता है। पुलिस से बचने के लिए VPN और सर्वर के इस्तेमाल जैसी कई प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाती हैं। फर्जी ऐप/वेबसाइट का इस्तेमाल करना, ट्रांजैक्शन ट्रैक करने जैसे टेक्निकल गुर भी सिखाते हैं। 20 लोग और थे सुरेश के संपर्क में कोटपूतली-बहरोड़ एसपी देवेंद्र बिश्नोई ने बताया कि जो कंबोडिया पहुंच चुके उनके परिवार वालों से काउंसलिंग कर बताया गया कि उनके बेटे गलत काम में लिप्त हैं, वहीं जो 20 लड़के सुरेश के संपर्क में थे, उनको समझाइश कर छोड़ा गया है। सुरेश के खिलाफ मामला दर्ज कर अनुसंधान जारी है। 2. जोधपुर का राहुल कंबोडिया भेजता था सिम, हो चुकी 1100 करोड़ की ठगी जोधपुर के बासनी थाना में साइबर ठगी का एक मामला दर्ज हुआ था। पुलिस ने उसकी जांच की तो ठगी के तार कंबोडिया से जुड़े नजर आए। जिस मोबाइल नंबर से ठगी हुई वो जोधपुर के पते पर खरीदा गया था। लेकिन मोबाइल नंबर कंबोडिया में एक्टिव था। पुलिस ने कंबोडिया में इस्तेमाल हुए करीब 2 लाख 30 हजार से अधिक मोबाइल नंबरों का डेटा निकलवाया। उस डेटा का भारतीय साइबर क्राइम समन्वय केंद्र (14C) के डेटा एनालिसिस किया। पता चला कि 36 हजार भारतीय सिम कंबोडिया में चल रही हैं। पुलिस ने इन 36 हजार नंबरों की डिटेल पता की तो उनमें 5 हजार 300 नंबर से 1100 करोड़ की ठगी सामने आई। उन मोबाइल नंबरों से लगातार ठगी हो भी रही है। इनमें से एक नंबर ऐसा था जो सालावास रोड जोधपुर के मुराद खान पुत्र बरकत खान के नाम पर था। यह सिम एक्टिव होने के बाद से कंबोडिया में रोमिंग नंबर से चल रही थी। इस सिम से तेलंगाना में 90 लाख की ठगी हो रखी थी। तेलंगाना पुलिस ने जब जोधपुर के सालावास रोड निवासी मुराद खान को इस ठगी के चलते संपर्क किया तब मुराद खान ने बासनी थाने में धोखाधड़ी और उसके नाम की फर्जी सिम का दुरुपयोग के चलते मामला दर्ज करवाया। उसके बाद पुलिस ने इस सिम की कड़ी से कड़ी जोड़ी। तब सामने आया कि जोधपुर के सांगरिया का रहने वाला राहुल झा जोधपुर, नागौर सहित कई जिलों से फर्जी सिम लेकर कंबोडिया के गिरोह को देता था। पुलिस राहुल झा की तलाश में है। पुलिस ने 20 जनवरी को फर्जी सिम विक्रेता जोधपुर निवासी मोहम्मद शरीफ, प्रकाश भील, नागौर निवासी रामअवतार राठी, हेमंत पंवार, अजमेर निवासी हरीश मालाकार व पंजाब निवासी संदीप भट्‌ट को गिरफ्तार किया है। जयपुर की होटल में सिम लेने पहुंचता था गिरोह फर्जी सिम कलेक्ट करने के लिए मलेशियाई नागरिक ली जियान हुइ, लो डी खेन, चेन यू मिंग, लिओंग केन नेथ जयपुर के टोंक रोड स्थित एक होटल में रुकते थे। वहां जोधपुर का राहुल झा मुलाकात करत सिम सौंपता था। फर्जी सिम से ठगी और बैंक खातों में इस्तेमाल राजस्थान से कंबोडिया पहुंची फर्जी सिम का ठग दो तरह से उपयोग कर रहे हैं। सिम को रोमिंग में एक्टिव कर कॉलिंग कर ठगी को अंजाम देते हैं। दूसरा इन मोबाइल नंबरों पर को म्यूल बैंक खातों (साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले बैंक खाते) से लिंक करते हैं। इससे बैंक खातों के सारे ट्रांजैक्शन की कमान इनके हाथ में आ जाती है। 3. बूंदी का आदित्य कंबोडिया पहुंचाता था बैंक खाते दिल्ली में एक महिला से 15 लाख की साइबर ठगी हुई थी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 18 जनवरी को आदित्य प्रताप सिंह को कोटा से गिरफ्तार किया था। इससे पहले तेलांगना से सुनिल को गिरफ्तार किया गया था वहीं से कंबोडियाई गैंग का खुलासा हुआ था। इसके बाद एक-एक कर 8 लोग पकड़े गए। इन सबका सरगना आदित्य प्रताप सिंह ही था, जो बैंक खाते कंबोडिया में ठगी करने वाली गैंग तक भिजवाता था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक तेलंगाना के हैदराबाद का सुनिल फर्जी कंपनी खोलकर उसके नाम से लोगों से बैंक खाते किराए पर लेता था। सुनिल ये खाते शंकर नाम के व्यक्ति को देता। हैदराबाद का शंकर लखनऊ के मनोज को बैंक खाते देता था और शंकर बनारस के संदीप को देता था। इसके बाद संदीप कोटा के आदित्यप्रताप को देश भर से इकट्‌ठा किए म्यूल अकाउंट का एक्सेस देता था। आदित्य प्रताप के जरिए ये बैंक खाते कंबोडिया में बैठे हैंडलर को मिल जाते थे। इन खातों से 4 करोड़ की ठगी का पता चलता है।