कोटा समेत हाड़ौती अंचल के किसानों के लिए इस बार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि बड़ी मुसीबत बनकर आई थी। गेहूं की फसल में नमी बढ़ने और दानों के सफेद पड़ने से बड़ी मात्रा में उपज सरकारी खरीद केंद्रों पर रिजेक्ट हो रही थी। इससे किसानों के चेहरे मायूस थे और उन्हें आर्थिक नुकसान का डर सता रहा था। लेकिन अब हालात बदलते नजर आ रहे हैं। सरकार द्वारा गेहूं खरीद मानकों में राहत देने के आदेशों के बाद किसानों को बड़ी राहत मिली है। खास बात यह है कि पहले जिन ट्रॉलियों को गुणवत्ता के आधार पर वापस लौटा दिया गया था, वही गेहूं अब दोबारा खरीद केंद्रों पर तुलाई के लिए पहुंच रहा है। इस बदलाव के पीछे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के हस्तक्षेप को अहम माना जा रहा है। नई गाइडलाइन के तहत गेहूं में चमक की कमी, हल्के दाने या बारिश से प्रभावित गुणवत्ता को अब पूरी तरह रिजेक्ट नहीं किया जा रहा, बल्कि निर्धारित सीमा के भीतर उसे स्वीकार किया जा रहा है। इससे किसानों को अपनी मेहनत की फसल का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद जगी है। किसान गौरीशंकर ने बताया कि पहले मंडियों में उनका गेहूं नापास कर दिया जाता था क्योंकि दाने सफेद पड़ गए थे। अब नई व्यवस्था के बाद उसी गेहूं की तुलाई हो रही है, जिससे उन्हें काफी राहत मिली है। अन्य किसानों का भी कहना है कि पहले खराब और सही गेहूं को अलग करने में काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब नियमों में ढील मिलने से प्रक्रिया आसान हो गई है। इस फैसले और हस्तक्षेप से किसानों के चेहरे पर फिर से मुस्कान लौट आई है और उन्हें आर्थिक संकट से उबरने में बड़ी मदद मिल रही है।
