एकल पट्टा प्रकरण में सरकार की ओर से दिल्ली से जयपुर आए एडिश्नल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू हाईकोर्ट में पैरवी नहीं कर सके। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा की अदालत में शुक्रवार को मामले को लेकर जैसे ही सुनवाई शुरू हुई। वैसे ही पूर्व मंत्री शांति धारीवाल और पूर्व आईएएस जीएस संधू की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एसएस होरा और विवेक राज बाजवा ने कहा- एएसजी इस मामले में सरकार की पैरवी नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि केस विड्रोल के मामले में बीएनएसएस की धारा-18 के तहत इस केस में सुनवाई के लिए पीपी और स्पेशल पीपी का नोटिफिकेशन जारी होना जरूरी है। वहीं एएसजी राजू का नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है। ऐसे में इन्हें मामले में पैरवी करने की अथॉरिटी ही नहीं है। इस पर कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगते हुए सुनवाई 2 सितंबर तक टाल दी। एसीबी कोर्ट ने अग्रिम अनुसंधान की दी है छूट दरअसल, इस मामले में एसीबी मामलों की विशेष कोर्ट ने 23 जनवरी के आदेश से एसीबी को मामले में अग्रिम अनुसंधान करने की छूट दी थी। कोर्ट ने यह निर्देश एसीबी के इस संबंध में दायर किए गए प्रार्थना पत्र पर दिए थे। धारीवाल, संधू सहित अन्य आरोपियों की ओर से दायर रिवीजन याचिका में कहा गया है कि जब राज्य सरकार ने एक बार मामले में दी गई अभियोजन को वापस ले लिया है तो बाद में वह आगे केस को नहीं चला सकती है। इस मामले में राज्य सरकार को न तो राजस्व की हानि हुई है और न ही कोई लेन-देन हुआ है। इसके जवाब में राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि मामले में आरोपियों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी वापस लेने के संबंध में कार्रवाई करने का अधिकार राज्य सरकार को ही है। यह मामला राज्य सरकार और अदालत के बीच का है। इसमें आरोपियों को रिवीजन दायर करने का अधिकार नहीं है, इसलिए उनकी रिवीजन याचिकाएं चलने योग्य नहीं हैं।