उदयपुर में उद्योग और वाणिज्य विभाग ने युवाओं और उद्यमियों के लिए एक खास कदम उठाया। शहर में एक जागरूकता सेमिनार आयोजित किया गया, जिसका मकसद युवाओं को सरकारी योजनाओं का फायदा उठाकर खुद का काम शुरू करने के लिए प्रेरित करना था। इस कार्यशाला के जरिए यह बताने की कोशिश की गई कि कैसे सरकारी मदद से कोई भी व्यक्ति अपने व्यापारिक सपनों को सच कर सकता है। कार्यशाला में मुख्य ट्रेनर के तौर पर सीए अंकित कोठारी मौजूद रहे। उन्होंने बहुत ही सरल भाषा में एमएसएमई (MSME) यानी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की बारीकियों को समझाया। कोठारी ने जोर देते हुए कहा कि आज का दौर डिजिटल है। अगर उद्यमी डिजिटल प्लेटफॉर्म और सरकारी नीतियों का सही तालमेल बिठा लें, तो वे बड़े ब्रांड्स के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। इससे न केवल उनका व्यापार बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर दूसरे युवाओं को भी रोजगार मिलेगा। सेमिनार के दौरान राज्य सरकार की कई बड़ी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। इनमें मुख्यमंत्री युवा उद्यम प्रोत्साहन योजना और विश्वकर्मा युवा उद्यम योजना जैसी स्कीम्स के बारे में बताया गया। साथ ही, डॉ. भीमराव अंबेडकर दलित आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना के तहत मिलने वाली विशेष छूट और फायदों की भी जानकारी दी गई। ऑर्गनाइजर राकेश लखारा ने युवाओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि सरकार स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए हर संभव मदद कर रही है। इन योजनाओं के जरिए वित्तीय सहायता के साथ-साथ तकनीकी मदद भी दी जा रही है। और राजीव राठौड़ ने बताया कि कार्यशाला में राजस्थान ट्रेड पॉलिसी, राजस्थान एक्सपोर्ट पॉलिसी और ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) जैसी नीतियों के बारे में भी बताया गया, ताकि स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके। कार्यक्रम के आखिरी सत्र में उद्यमियों की शंकाओं को दूर किया गया। उन्हें बताया गया कि आवेदन कैसे करना है और कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं। आयोजकों ने सभी से अपील की कि वे इन जानकारियों को दूसरों तक भी पहुंचाएं ताकि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले और उदयपुर के युवा आत्मनिर्भर बन सकें।