जयपुर अब सिर्फ पर्यटन नगरी नहीं रहा, बल्कि देश का उभरता शिक्षा हब बन गया है। पहले यहां टूरिज्म की पहचान थी, लेकिन पिछले चार-पांच सालों में शांत वातावरण, अफोर्डेबल हाउसिंग, बेहतर शिक्षा स्तर और सरकार की स्किल डेवलपमेंट नीतियों ने जयपुर को छात्रों की पहली पसंद बना दिया है। UP, बिहार, महाराष्ट्र, आंध्र, नॉर्थ-ईस्ट समेत पूरे भारत के 426 जिलों से बच्चे यहां पढ़ने आ रहे हैं। अपेक्स यूनिवर्सिटी ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। 1965 से चली आ रही संजय शिक्षा समिति की विरासत पर खड़ी यह यूनिवर्सिटी प्ले ग्रुप से पोस्ट ग्रेजुएशन तक काम कर रही है। आज यहां 10-15 हजार छात्र पढ़ रहे हैं और 2-3 लाख से ज्यादा एलुमनी देश-विदेश में अच्छी पोजीशन पर हैं। यूनिवर्सिटी NEP-2020 को पूरी तरह लागू कर रही है। मल्टीडिसिप्लिनरी कोर्सेस, जॉब-ओरिएंटेड प्रोग्राम्स और स्किल बेस्ड ट्रेनिंग दे रही है। विदेशी यूनिवर्सिटीज के साथ फैकल्टी और स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। AI और स्टार्टअप्स पर खास फोकस है। स्टार्टअप क्लब बनाए गए हैं, छात्र ग्रुप बनाकर आइडिया पर काम करते हैं। यूनिवर्सिटी फाइनेंशियल सपोर्ट देती है। DST और आई-स्टार्ट राजस्थान जैसी स्कीम्स से फंडिंग मिल रही है। छात्र राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्टार्टअप कॉम्पिटिशन में भाग ले रहे हैं। रवि जुनेवाल के अनुसार सरकार अगर पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप बढ़ाए और जयपुर को “एजुकेशन सिटी” के रूप में प्रमोट करे तो यहां यूरोप-अमेरिका से भी छात्र आ सकेंगे। अपेक्स यूनिवर्सिटी स्किल, स्टार्टअप और ग्लोबल सहयोग से छात्रों का उज्ज्वल भविष्य तैयार कर रही है।
